
बरेली। गुरुवार से शुरू हो रहे नवरात्र सभी के लिए बेहद शुभ हैं, क्योंकि माता रानी का आगमन इस बार ‘गज’ (हाथी) पर होगा। जोकि माता लक्ष्मी की विशेष कृपा और सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
गुरुवार का दिन होने से देवी पूजा के साथ-साथ भगवान विष्णु की भी पूजा का फल मिलता है और इस साल दो गुरुवार पड़ने से पूजा का विशेष फल मिलेगा।
माता का वाहन (गज): गुरुवार को नवरात्र शुरू होने पर माता दुर्गा हाथी (गज) पर सवार होकर आती हैं, जो ज्ञान, समृद्धि और अच्छी बारिश का संकेत है।
विशेष संयोग: इस बार चैत्र नवरात्रि 19 से 27 मार्च तक है।
विद्वान पंडित धुर्व कुमार निर्भीक का कहना कि गुरुवार का दिन भगवान विष्णु का है, इसलिए दुर्गा पूजा के साथ गुरुवार का व्रत करने से भगवान विष्णु और लक्ष्मी मां की भी कृपा मिलती है।
उन्होंने यह भी बताया कि शुभ संकेत: हाथी को सफलता, धन और समृद्धि से जोड़ा जाता है। इसलिए, गुरुवार से शुरू होने वाले नवरात्र को बहुत भाग्यशाली माना जाता है।

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करें। घटस्थापना (कलश स्थापना) कर मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा शुरू करें। दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन करें।
इस दौरान पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।
गुरुवार विष्णु जी का दिन है और नवरात्र देवी का। ऐसे में विष्णु-शक्ति की पूजा से ज्ञान, धर्म, और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मां दुर्गा का आगमन: माता रानी इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही हैं, जिसे अच्छी बारिश और ज्ञान-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
व्रत और नियम: लोग 9 दिनों तक व्रत, कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ और कन्या पूजन करते हैं। पहले दिन घर में हल्दी युक्त जल से शुद्धि करके कलश स्थापित की जाती है।
क्या करें और क्या न करें?
करें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, पीले वस्त्र पहनें (गुरुवार के कारण), और कलश स्थापित करें।
न करें: इन दिनों में नकारात्मक सोच से बचें और सात्विक भोजन करें।
संक्षेप में, यह गुरुवार से शुरू हो रहे नवरात्र आध्यात्मिक शुद्धि, समृद्धि और सकारात्मकता लाने वाला एक बड़ा पर्व है।