
जनपद एटा में सहकारी समितिययों पर खाद के लिए मारामारी देखी जा सकती है । आलम यह है कि खाद लेने के लिए अब किसान परिवारों की बहू बेटियों को भी लाइन में लगना पड़ रहा है , लेकिन उनको आवश्यकतानुसार खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है । जहां खाद उपलब्ध हो रही है वहां भी ऊंट के मुंह में जीरा । वीडियो का नजारा जनपद एटा के सहकारी केंद्र शीतलपुर का है , जहां महिलाएं भी बड़ी संख्या में खाद के लिए लाइन में लगी हुई हैं । बात केवल शीतलपुर की ही नहीं है , पूरे जिले में लगभग ऐसे ही हालत हैं । प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है।
अपने ही दावों पर विफल सरकार या खाद माफियाओं का प्रभाव ?
सरकार के द्वारा किसानों को खाद उपलब्ध कराने के लिए बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हों लेकिन वास्तविक तथ्य और सत्य
इन दावों के बिल्कुल विपरीत हैं ।
खाद के लिए घंटों तक लगने वाली लंबी-लंबी कतारों में महिलाओं को देखा जा सकता है , इसके बाद भी आवश्यकता अनुसार खाद उपलब्ध नहीं हो रही है।
एसी लगे ऑफिस में बैठकर माइक के आगे झूठ बोलने में कोई श्रम नहीं होता है , लेकिन वास्तविकता में धरातल पर उतरकर तथ्य और सत्य देखे जाएं तो सारे दावे झूठ और हवा हवाई साबित होते हैं ।
क्यों उपलब्ध नहीं हो रही है आवश्यकतानुसार खाद ?
अपने दावों के अनुसार केंद्र से लेकर राज्य तक किसान हितैषी सरकार बैठी हुई है , लेकिन इसके बाद भी किसानों को आवश्यकता अनुसार खाद समय पर उपलब्ध न होना किसान हितैषी होने के दावों की पोल खोल रहा है ।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे सिस्टम के पीछे सैकड़ों करोड रुपए का व्यापार है । सहकारी केंद्रों पर खाद उपलब्ध हो ना हो , लेकिन ब्लैक मार्केट में हमेशा उपलब्ध रहती है। जब किसान को समय पर खाद नहीं मिलेगी , तो वह उसे किसी भी प्रकार विवश होकर ब्लैक मार्केट से अधिक मूल्य पर
खरीदेगा , जिससे कालाबाजारी करने वाले खाद माफियाओं की मोटी कमाई होती है । खाद माफिया तो इससे भी दो स्टेप आगे हैं ,वह किसान को खाद के साथ में लगेज के रूप में अन्य घटिया क्वालिटी के उत्पाद भी , किसान को उसकी इच्छा के विरुद्ध जबरन थमा देते हैं , खाद के चक्कर में किसान को लगेज उत्पादन भी खरीदना पड़ता है ।
क्या कोई सरकार कर सकी है अब तक इस समस्या का समाधान?
आवश्यकता के समय किसान को खाद की आपूर्ति पूरी करने के दावे तो वर्तमान और पूर्व की सरकार में भी करती रही हैं , लेकिन धरातल पर आज तक कोई भी सरकार किसान को समय पर आवश्यकतानुसार खाद उपलब्ध नहीं करा पाई है , किसानों को ब्लैक मार्केट से अधिक मूल्य पर खाद खरीदनी ही पड़ी है । सूत्रों की मानें तो सरकार कोई भी हो , खाद माफिया अपने सिस्टम के प्रभाव के चलते
कृत्रिम कमी उत्पन्न कर खाद को अधिक मूल्य पर बेचकर दशकों से लाभ कमा रहे हैं। कोई भी सरकार आज तक इनके सिस्टम को रोक नहीं पाई है।
प्रशासन करेगा समस्या का हल या रहेगा विफल ?
किसानों को समय पर आवश्यकतानुसार खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराना प्रशाशन और किसान हितैषी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारियों में से एक है , लेकिन इन जिम्मेदारियां का निर्वहन कितनी तन्मयता से किया जा रहा है उसका परिणाम आपके सामने है । जिलाधिकारी महोदय को इस पूरे प्रकरण का संज्ञान लेकर किसानों की समस्या दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए ।