खबर मिर्जापुर से

अदलहाट थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोल्हूआ में शिया समुदाय द्वारा आठवीं मोहर्रम को मातम जुलूस निकाली गई। इसमें ऊंट घोड़े भी शामिल रहे। यह जुलूस बहुत पुरानी कद्दीमी जुलूस है जो आठ मोहर्रम के नाम से जाना जाता है। इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए लड़ाई लड़ी। यजीद दीन ए इस्लाम को मिटाना चाहता था और हुसैन इस्लाम को बचना चाहते थे, इस्लाम ही नहीं पूरी दुनिया और आलमी को बचाया ताकि हक बरकरार रहे। दो मोहर्रम को वारगी कर्बला हुए, और 10 मोहर्रम को इमाम हुसैन की शहादत हो गई। इमाम हुसैन हक और इस्लाम के लिए निकले थे। इमाम हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए अपने पूरे परिवार को इस्लाम के लिए कुर्बान कर दिया। सैयद मुसैयब अली ने बताया कि हुसैन ने लोगों को बहुत से संदेश दिए जिस पर आज भी लोग चलते हैं, उन्होंने यह भी बताया कि हर इंसान को अपनी जिंदगी गुजारने का हक है, अधिकार है सभी को अपनी जिंदगी अपना हक गुजरने का पूरा हक है। आज पूरी दुनिया में इस्लाम को मानने वाले मातम मनाते है। वहां पर थाना अदलहाट से प्रशासन भी चुस्त दुरुस्त मौजूद दिखाई दी। बड़े ही शांति व्यवस्था से आठवीं मोहर्रम बीता। इस अवसर पर नजरे हसन, ईबने हसन आडवानी, आले हसन, कमरून, मोहम्मद अली, नजरे हुसैन, दानिश, निसार अली, राजू, पप्पू, गडगड भाई, मोहम्मद सैफ, मुस्तफा, अच्छे हसन, मोजीज अब्बास, शहजादे हुसैन, बदरुल हसन इत्यादि सैकड़ो लोग मातम में उपस्थित रहे।
मिर्जापुर से यासीन खान की रिपोर्ट