अमेरिका के हाथ लगा सीक्रेट प्लान, फिर एक्टिव हुआ ट्रंप प्रशासन और करा दी सीजफायर!

India-Pakistan War: आज होने वाला था भीषण हमला… अमेरिका के हाथ लगा सीक्रेट प्लान, फिर एक्टिव हुआ ट्रंप प्रशासन और करा दी सीजफायर!

  • आज होने वाला था भीषण हमला… US के हाथ लगा सीक्रेट प्लान, फिर यूं हुआ सीजफायर

India-Pakistan Ceasefire: भारत और पाकिस्तान के बीच 7 मई से शुरू संघर्ष शनिवार अचानक थम जाने के बाद, कई तरह के सवाल उठ रहे हैं. भारत ने जहां ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, वहीं पाकिस्तान ने भी भारत के सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की. हालांकि, भारत की मजबूत सुरक्षा कवच ने उसके सारे हमले के नाकाम कर दिया. इस बीच शनिवार शाम को घोषित सीजफायर का क्रेडिट लेने में अमेरिका भी पीछे नहीं है. इस बारे में सीएनएन ने एक लंबी रिपोर्ट प्रकाशित की है.

इससे पहले अमेरिका ने दोनों देशों के बीच जंग पर साफ कह दिया था- it’s None of My Business. मगर, अब उसका दावा है कि उसे दोनों देशों के बीच जंग को लेकर खुफिया जानकारी मिली थी कि शनिवार की रात को दोनों देशों के बीच भीषण युद्ध होने की संभावना है. अमेरिका का कहना था कि दोनों देश सीधे तौर पर बात नहीं कर रहे थे. बात ना होने की वजह से दोनों के बीच भीषण युद्ध की संभावना बढ़ गई थी.

सीएनएन के हवाले से, अमेरिका का कहना है कि इंटेलिजेंस से खबर मिली थी कि वीकेंड पर दोनों के बीच भीषण युद्ध हो सकता है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने दोनों देशों के बीच जारी जंग पर नजर बनाए हुए थे. वेंस ने कहा कि वीकेंड पर इंटेंश युद्ध के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बातचीत कर दोनों देशों को तनाव कम करने और युद्धविराम की दिशा में कदम बढ़ने के लिए राजी किया.

पल्ला झाड़ने वाला अमेरिका क्यों किया हस्तक्षेप
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि खुफिया से वीकेंड पर दोनों देशों के बीच जंग की भीषण रूप ले सकती है. खासकर, जब पाकिस्तान के रावलपिंडी में नूर खान हवाई अड्डे पर भारतीय ड्रोन ने हमला किया. यह सैन्य ठिकाना पाकिस्तान के परमाणु हथियारों की रक्षा करने वाली स्ट्रैटेजिक प्लान्स डिवीजन के मुख्यालय के करीब है. एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह हमला पाकिस्तान की परमाणु कमांड अथॉरिटी को निशाना बनाने की चेतावनी के रूप में देखा जा सकता है, जिससे परमाणु युद्ध का खतरा बढ़ गया था.

वांस-मोदी की कूटनीति
वांस ने शुक्रवार दोपहर (Eastern time) मोदी से बात की. भारत को पाकिस्तान से सीधा बात करने के लिए राजी किया. उन्होंने एक “ऑफ-रैंप” (तनाव कम करने का रास्ता) का प्रस्ताव भी रखा. इसे (अमेरिका के अनुसार) पाकिस्तान स्वीकार करने को तैयार था. वांस के नेतृत्व में, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दोनों देशों के समकक्षों के साथ रातभर बातचीत की. ट्रंप प्रशासन ने समझौते का मसौदा तैयार करने में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन उसकी मुख्य भूमिका दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर लाने की थी.

युद्धविराम की घोषणा
शनिवार को भारत और पाकिस्तान ने पूर्ण और तत्काल युद्धविराम की घोषणा की. डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को क्रेडिट देने लगे कि उनकी मध्यस्थता की वजह से ही ये संभव हो पाया. हालांकि, भारत ने सीधे तौर पर तो नहीं मगर, इस दावे को खारिज कर दिया है. भारत के अनुसार, यह दोनों देशों के बीच “सीधा समझौता” था. वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री युद्ध विराम के बाद अमेरिका को धन्यवाद देते नहीं थक रहे थे. मगर, सीजफायर होने के बाद भी पाकिस्तान ने दोबारा अपनी नापाक हरकत दिखा दी. युद्धविराम के 3 घंटे के बाद ही कश्मीर में खास कर वैष्णों देवी पर ड्रोन हमला कर दिया. हालांकि, भारत ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया.

अमेरिकी रुख में बदलाव
वांस ने गुरुवार को फॉक्स न्यूज़ से कहा था कि यह संघर्ष ‘मूल रूप से हमारा मसला नहीं है.’ अमेरिका दोनों देशों को हथियार डालने के लिए मजबूर नहीं कर सकता. लेकिन खुफिया जानकारी और परमाणु युद्ध की आशंका ने ट्रंप प्रशासन को सक्रिय भूमिका निभाने के लिए मजबूर किया. वांस ने पिछले महीने भारत की यात्रा के दौरान मोदी से मुलाकात की थी. ट्रंप प्रशासन का मानना था कि यह रिश्ता इस संकट में मददगार साबित होगा.

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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