
भारत माता मंदिर: राष्ट्रभक्ति का तीर्थ
भारत में कुछ विशिष्ट भारत माता मंदिर स्थापित किए गए हैं जो न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी भावना के रूप में भी महत्वपूर्ण हैं।
भारत माता मंदिर, वाराणसी
यह मंदिर 1936 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा बनवाया गया था और ये भारत का पहला भारत माता का मंदिर है, जिसका उद्घाटन महात्मा गांधी ने किया था। इस मंदिर में भारत माता की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां पर देश का उभरा हुआ त्रिविमीय नक्शा है, जो कि संगमरमर पर अंकित है।
भारत माता मंदिर, हरिद्वार
यह मंदिर 1983 में स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि द्वारा स्थापित किया गया था, इस मंदिर में कई स्वतंत्रता सेनानियों, ऋषियों, संतों और देवियों की मूर्तियां भी भारत माता की मूर्ति के साथ नजर आती हैं।
भारत माता का मंदिर, कोलकाता
यह मंदिर कोलकाता के माइकल नगर में स्थित है। यहाँ भारत माता को “जगत्तारिणी दुर्गा” के रूप में पूजा जाता है। इसका उद्घाटन 19 अक्टूबर, 2015 में तत्कालीन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी द्वारा किया गया था।
भारत माता का मंदिर,कुरुक्षेत्र
जुलाई 2019 में, हरियाणा के तत्कालीम मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भारत माता के मंदिर के निर्माण के लिए “भारत माता ट्रस्ट” को महाभारत-युगीन ज्योतिसर तीर्थ के पास 5 एकड़ जमीन दी थी।
भारत माता मंदिर का महत्व
भारत माता मंदिर यह बताता हैं कि भारत एक जीवंत संस्कृति है, न कि मात्र एक भूगोलिक इकाई।
भारत माता की पूजा करने से जनमानस में मातृभूमि के लिए प्रेम और बलिदान की भावना जागृत होती है।
भारत माता मंदिर धर्म निरपेक्षता का संदेश देती है।
कहां से आया ‘भारत माता की जय’
अब बात करते हैं ‘भारत माता की जय’ उद्घोष की, सन 1873 में किरन चंद्र बनर्जी ने एक नाटक लिखा था जिसका नाम था ‘भारत माता’, जिसमें पहली बार ‘भारत माता की जय’ कहा गया था और अब भारतीय का भी ध्येय वाक्य (मोटो) बन चुका है।