
सिन्दरी, धनबाद।
वैश्विक हीरा उद्योग में एक क्रांतिकारी तकनीक के रूप में डायमंड-करेंसी का शुभारंभ किया गया है। बिग डेटा सॉल्यूशंस, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में विशेषज्ञता रखने वाले स्टार्टअप एनकोर द्वारा इस नई इनोवेटिव तकनीक की खोज की गई है, जो वैश्विक स्तर पर हीरों के व्यापार के तरीके और उसकी कीमतों को पुनः परिभाषित करने के लिए तैयार है। अब से पहले हीरे एवं सभी मूल्यवान धातुओं का मूल्यांकन वैश्विक स्तर पर ब्रिटेन द्वारा तय किया जाता रहा है। इस तकनीक के आने के बाद इनका मूल्यांकन अब भारत द्वारा किया जाना संभव हो पाएगा ।
प्रतिष्ठित इंटरनेशनल डायमंड एक्सचेंज के समर्थन से, यह पहल हीरे के व्यापार को स्थिर करने और उसे बढ़ावा देने के लिए एक भविष्यवादी दृष्टिकोण प्रदान करती है।
इस क्रांतिकारी तकनीक के पीछे श्री पंकज कुमार जी की सोच है, जो झारखंड के सिंदरी, धनबाद के एक दूरदर्शी उद्यमी हैं। श्री कुमार ने 2020 से 2022 के बीच बीआईटी सिंदरी में एक सफल स्टार्टअप चलाया था।
प्रौद्योगिकी और बहुमूल्य रत्नों के बाजार की गहरी समझ के साथ, कुमार का उद्देश्य वैश्विक हीरा बाजार के साथ दुनिया के हीरा व्यापार में बदलाव लाने का है। उनकी कंपनी, एनकोर, ने सुनिश्चित किया है कि डायमंड-करेंसी न केवल विश्वसनीय हो, बल्कि हीरों के अस्थिर मूल्यों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी रहे।
डायमंड-करेंसी को क्या बनाता है अनोखा?
पारंपरिक बाज़ार के विपरीत, डायमंड-करेंसी सीधे हीरे के मूल्य और हीरा उद्योग की गतिविधियों से जुड़ी है। यह मुद्रा एक इंडेक्स पर आधारित होगी जो हीरा बाजार में वास्तविक समय की गतिविधियों को दर्शाएगा, जिससे मुद्रा का मूल्य हीरों की वास्तविक कीमत और अन्य प्रमुख वैश्विक मुद्राओं से आंतरिक रूप से जुड़ा रहेगा। यह दोहरी-लिंक सुविधा इसे अस्थिर बाजारों की तुलना में अधिक स्थिर और सुरक्षित विकल्प बनाती है।
हीरा उद्योग के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन
आर्थिक मंदी का शिकार हुआ भारतीय हीरा व्यापार अथवा विश्व के अन्य देशों के हीरा व्यापार को इससे मिलेगी बड़ी राहत ।
इंटरनेशनल डायमंड एक्सचेंज, जो वैश्विक हीरा व्यापार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, ने इस परियोजना का समर्थन किया है। इसे हाल के वर्षों में बाजार में छाई मंदी एवं उतार-चढ़ाव और मांग में कमी सहित कई अन्य चुनौतियों का सामना कर रहे हीरा उद्योग को पुनर्जीवित करने का एक बहुत बढ़िया तरीका माना जा रहा है।
इज़राइल ने किया पहल
एक ऐतिहासिक कदम के रूप में, इज़राइली सरकार ने अपने डायमंड एक्सचेंज मार्केट के लिए डायमंड-करेंसी को सबसे पहले अपनाया है। इस पहल से इज़राइल इस तकनीक को वैश्विक स्तर पर अपनाने वाला सबसे पहला देश बन गया है, जिससे अन्य हीरा-समृद्ध देशों के लिए रास्ता और भी आसान हो गया है। इज़राइल में इस डिजिटल मुद्रा के इस्तेमाल से हीरा व्यापार को सुव्यवस्थित करने में मदद मिलेगी और इससे नए निवेशकों को भी आकर्षित करने की उम्मीद है।
वैश्विक प्रभाव
अन्य 70 देशों में इसकी पहल होने की संभावना है ।
डायमंड-करेंसी को उन सभी देशों में उपलब्ध कराने की योजना है जिनका हीरा बाजार से संबंध है।
भारतीय हीरा उद्योग को अमेरिका और यूरोप के कई प्रतिबंधों के कारण अब तक बहुत नुकसान हुआ था । भारतीय हीरा उद्योग को इन्होंने अपनी सूची से भी बाहर कर रखा था लेकिन इस कदम से पूरे दुनिया के 160 देशों में भारत की धाक जमेगी ।
यह डिजिटल मुद्रा जल्द ही बहुमूल्य रत्नों के व्यापार में एक नया आयाम खोलेगी। उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह नई तकनीक न केवल हीरे की कीमतों को स्थिर करेगा, बल्कि उन निवेशकों के लिए एक नया रास्ता भी खोलेगा जो सुरक्षित, संपत्ति-समर्थित डिजिटल मुद्राओं की तलाश में हैं।