अब न कोई शहाबुद्दीन होगा न अतीक होगा न मुख्तार अन्सारी होगा

बिखरे हुए आशियाने का मंजर न पूछ!
किस किस ने उतारा मेरे सीने में खंजर न पूछ!!
बड़ी शिद्दत से करता रहा मेरा कत्ल धीरे धीरे!
महकता चमन कैसे हुआ बंजर न पूछ!!
बाहुबली मुख्तार अंसारी की मौत के बाद माफियाडान शब्द ही लगभग विलोपित हो गया!बिहार में चर्चित नाम माफियां शहाबुद्दीन , की मौत भी सजा काटते समय जेल की सलाखों में 21म ई 2021दिन शनिवार को हुई,!दहशत का पर्याय अतीक अन्सारी की पुलिस अभिरक्षा मे सरेयाम गोलियों से भूनकर 15 आप्रैल 2023दिन शनिवार को हत्या कर दिया गया था!रामराज के दस्तक के बाद माफियाओं के मस्तक पर मौत ने दस्खत कर दिया!,मुन्ना बजरंगी की खरनाक शोहरत जेल में मोहलत नहीं पाई जीवा ने खेल खत्म कर दिया!,कोई अदालत में जाते समय मार‌ दिया गया कोई पुलिस मुठभेड़ में मालिक को प्यारा हो गया! किसी की गाड़ी पलट गई! जो खुद दहशत थे- उनके आगे पीछे दहशत घूमने लगी! कहा गया सब दिन जात न एक समाना! वक्त है साहब इसने जिनकी ताज पोसी किया उनको भी खामोशी में भेज दिया!अजीब विडम्बना है- दौलत- शोहरत‌ के गुमान में शामिल हसरत सियासी नफरत की आग में इस कदर घिरी की मजहबी उल्फत का बगीचा पूरी तरह जलकर खाक हो गया! कल‌ रात माफियाओं की फ़ेहरिस्त में नम्बर एक में शामिल मुख्तार अन्सारी की ज़िन्दगी भी कहानी बनकर रह गई!किसी के लिए मसीहा तो किसी के लिए मौत का सौदागर -तीन दशक था खौफ का दुसरा नाम बना वह बाहुबली भी उसी गली से हमेशा के लिए बाहर निकला जिस गली से बिहार का माफिया डान शहाबुद्दीन ने मकाम हासिल किया था! खत्म हो गया माफियाओं का शामराज्य मुस्कराने लगा है रामराज्य ! गरीबों की आह !इन्सानियत की परवाह !नहीं करने वाले जिस अथाह धन दौलत सम्पत्ति के बल पर साम्राज्य स्थापित किए कुछ काम नहीं आया! मौत के खेल में सभी फेल हो गये!कोई अदालत में तो कोई जेल में सो गए!- अजीब विडम्बना है! सभी को एक निश्चित समय तक ही यहां रहना है! कोई शहंशाह बनकर जाता है! कोई बादशाह बनकर जाता है!कुछ गुमनामी में चले जाते! कुछ लोग इतिहास बन जाते हैं! उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर भयंकर तूफान चल रहा है! उत्तर प्रदेश के दम पर ही हिन्दुस्तान का शौर्य पल रहा है! योगी राज में दहशत शब्द पर पूर्ण विराम लग गया! जिसने भी फड़फड़ाने की कोशिश किया इतिहास बन गया!दशकों तक खौफ का मंजर !एक ही नाम की चर्चा घर घर! सियासतदार उनके झंडा बरदार बनकर घुटने टेक देते!बड़े से बड़ा अफसर उनके एक फोन काल पर दहशत से बिल बिला उठते!,मजहबी उन्माद के सिंहनाद से सहमी सहमी फिज़ा में अजीब तरह की दहशत थी!उनपर खूब मेहरबां कुदरत थी!हर रोज परवान चढ़ रही हसरत थी! मगर साहब वक्त तो सबका बदलता है!सूरज भी निश्चित रूप से शाम को ढलता है।यह तो होना ही था! हर कोई जानता खूंखार शेर जब शिकंजे में फस जाता है तो शिकारी उस पर हर पल भारी पड़ता है!आज अजीब तरह का सन्नाटा है! सड़कों पर पुलिस बल के बूटों की चर मराहट भरी आवाज से लोग सकते में हैं!भीतर ही भीतर बारूद सुलग रही मगर मौसम का मिजाज बदला हुआ है!अन्दर ही अन्दर उसे दफ्न हो जाना है। जरा सोचिए वह भी क्या मंजर था जब बिहार का शहाबुद्दीन सिकन्दर था! यूपी में मुख्तार का रूतबा भयंकर था! तो अतीक के अतीत का डर इलाहाबाद मे घर घर था!अपराध की दुनियां का बेताज बादशाह मुन्ना बजरंगी के नाम को सुनते ही लोग चकर घिन्नी काटने लगते थे। पुलिस को पसीना आने लगता था। मगर साहब सब ही को मौत के डगर पर ही चलना पड़ा!खौफ, दहशत, डान, जैसे कालजई शब्दों से सुशोभित रावण से भी अधिक दम्भ रखने वालों का नामो निशान मिट गया! बदलते समाज में नवसृजन के श्रृंगार को धारण करती धरणी धरा पर आज भी वह परम्परा मूर्त रूप में मौजूद हैं !जहां पर कहा गया है–
जब जब होई धर्म की हानी बाढ़ें सुर असुर अभिमानी,
तब तब प्रभु लीन मनुज शरीरा——–!!सच के सतह पर फतह हासिल करती ब्यवस्था आस्था की वारिश में जिस फसल को पुष्पित पल्लवित कर रही है उसके सुखद परिणाम के लिए ही इन्सानियत की खेती को बर्बाद करने वालों का सफाया प्रकृति कर रही है!कुछ खुद ही अस्ताचल में चले गये कुछ को कानून ने उठा दिया!जो कुछ हो चाहे जैसे भी रहे हो आज जमाना रो रहा है कुछ लोग तारीफ तो कुछ तकलीफ़ बयां कर रहे हैं।जाना तो सभी को एक दिन है लेकिन जब भी सूरमा दुनियां से बिदा होते हैं सदियों तक लोग याद करते हैं। अब न कोई शहाबुद्दीन होगा न अतीक होगा न मुख्तार अन्सारी होगा!अपराधी रक्त बीज के तरह पैदा होते हैं यह सदियों की कहानी है। बस बात वही है बुरे काम का बुरा नतीजा ना मानो तो कर। देखो जिसने जिसने किया है यारो उनका उनका घर देखो!
जयहिंद ????

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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