एटा,राम जन्मभूमि आंदोलन- कई दिनों तक अरुणा नगर मौहल्ला बना रहा पुलिस की दविशों का केंद्र
22 जनवरी को अयोध्या में भव्य रूप से भगवान राम की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा पूर्ण होगी और मंदिर समूचे विश्व में अपनी भव्यता के लिए जाना जाएगा। इस ऐतिहासिक क्षण को लाने में एटा के मौहल्ला अरुणानगर के निवासियों का योगदान भले ही सागर में सेतु निर्माण में अपने बालों में रेत भरकर लाने वाली गिलहरी के समान हो, लेकिन नजरंदाज नहीं किया सकता। जब एक ही मौहल्ले के दो परिवारों के पिता पुत्रों को इस महान क्षण को लाने के लिए जेल यात्राएं करनी पड़ी।
पहला परिवार रहा प्रांतीय संस्कृत भाषा प्रमुख विश्व हिंदू परिषद वैद्य श्यामविहारी मिश्र का। जिन्हें पुलिस ने कासगंज के रामाधार जाजू आदि के साथ सत्याग्रह के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेजा। वहीं उनके पुत्र आशुतोष मिश्र को नारायण भास्कर द्वारा किए जा रहे सत्याग्रह को असफल करने के लिए पुलिस ने 2 नवंबर को उनके आवास से गिरफ्तार कर जिला कारागार में भेज दिया।
वहीं दूसरा परिवार रहा वरिष्ठ अधिवक्ता एवं आरएसएस के जिला पदाधिकारी डा. नारायण भास्कर एडवोकेट का। जिन्हें 2 नववंर 1990 को सत्याग्रह के दौरान उनके ग्यारह वर्षीय बेटे अरुण कुमार उपाध्याय व सोमदेव पदमेश शास्त्री, धीरेद्र यादव आदि के साथ जनता दुर्गा मंदिर के चौराहे से पुलिस की टीम ने अपनी हिरासत में लिया। सात दिन तक जिला कारागार में रहने के बाद रिहा किया गया। इस मामले में खास बात यह रही कि डा नारायण भास्कर एडवोकेट ने पूर्व से ही प्रदेश के मुख्यमंत्री पुलिस महानिदेशक आदि को अपने सत्याग्रह और उसमें प्रयोग होने वाले नारों आदि के बारे में नोटिस दे दिया था। ऐसे में उनके परिवार पर पुलिस की दविशें देना लाजमी था। बहरहाल जब अयोध्या में भव्य मंदिर में रामलला विराजमान हो रहे है तो यह दोनों परिवार अपने उस समय को प्रयासों को सार्थक मान रहे है।



फोटो- आशुतोष मिश्रा
फोटो- नारायण भास्कर एडवोकेट
फोटो- अरुण कुमार उपाध्याय एडवोकेट