कम्बल की आस में ठिठुर रहे गरीब*

एटा । सहाब इन ठंड से ठिठुरते गरीबों पर भी मानवीय दृष्टि डाल दिया करें, बड़ा पुन्य होगा, बेचारे एक कम्बल की आस में सुबह से देर समय तक ठंड में ठिठुरते रहते हैं …
कम्बल की आस में ठिठुर रहे गरीब*

एटा । सहाब इन ठंड से ठिठुरते गरीबों पर भी मानवीय दृष्टि डाल दिया करें, बड़ा पुन्य होगा, बेचारे एक कम्बल की आस में सुबह से देर समय तक ठंड में ठिठुरते रहते हैं …