
अन्नू टंडन- अर्श से फर्श तक
जन्मदिन पर विशेष
क्या उन्नाव जिले के जातीय आंकड़ों में फिट नहीं बैठी पूर्व सांसद अन्नू टंडन?
कभी उन्नाव में नारी सशक्तिकरण का प्रतीक मानी जाती थीं अन्नू टंडन और दैनिक जागरण जैसे समाचार पत्र के राष्ट्रीय अंक संगिनी में उन्होंने जगह बनायी थी लेकिन 2014 में उन्हें 20% से भी कम वोट मिले और 2019 में में उनकी जमानत तक जब्त हो गयी। ऐसा नहीं कि उन्होंने कार्य नहीं किये। सांसद रहते हुए उन्होंने hriday narayan dhawan charitable trust के माध्यम से हर सप्ताह एक दो परिवारों की मदद की। उस समय hndct सबसे बड़ी संस्था मानी जाती थी। निसंदेह वो बेहतरीन समाज सेविका हैं लेकिन शायद राजनीतिक दृष्टिकोण से जनता उन्हें नकार रही है। भले ही hndct अब उतना सक्रिय नहीं है लेकिन उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई है। सांसद रहते हुए कभी उन्होंने पुलिस थानों में सिफारिश नहीं की न ही उनके दामन पर अवैध कामों से सम्बन्धी कोई दाग़ लगा। बावजूद इसके जनता उन्हें पिछले दो चुनावों में लगातार नकार चुकी है और राजनीतिक पहलू से अर्श से फर्श तक पहुंच चुकी है। लगभग 3 वर्ष पूर्व उन्होंने कांग्रेस छोड़ कर सपा का दामन थाम लिया। यहां भी 2022 विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण में उनका रसूख देखने को मिला और भगवंत नगर में टिकट व विजय के प्रबल दावेदार माने जा रहे कृपा शंकर को दरकिनार कर सपा ने अन्नू टंडन के चहेते प्रत्याशी को टिकट दी। हालांकि कभी सपा का गढ़ माने जाने वाले उन्नाव में इस बार भी सपा एक भी विधानसभा में अपना खाता तक न खोल सकी। बावजूद इसके इसे अन्नू टंडन का प्रभाव ही माना जायेगा कि विपक्ष के गठबंधन की तरफ से उन्हें ही प्रत्याशिता का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। हालांकि नकुल दुबे उत्तम लोधी व अन्य भी जातीय आंकड़ों के हिसाब से बेहतरीन दावेदार माने जा रहे हैं लेकिन शायद दांव अन्नू टंडन पर ही लगेगा। इतने प्रभावशाली व्यक्तित्व की लगातार दो चुनावों में दुर्दशा के बाद यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि या तो वो जातीय आंकड़ों में फिट नहीं बैठती या उनके कार्यकर्ता कोई कमी छोड़ देते हैं जिसकी वजह से उनका राजनीतिक करियर अर्श से फर्श तक पहुंच गया। खैर जन्मदिन पर आदरणीय अन्नू दीदी को हार्दिक बधाई व आगामी चुनाव हेतु शुभकामनायें। ईश्वर से प्रार्थना है आगामी चुनावों में आपको टिकट मिले और आपकी राजनीतिक दशा भी सुधरे सादर प्रणाम. Happy birthday deedi ?