
संक्रामक रोगों की दस्तक,सभी को स्वच्छता बरतने के लिए तत्पर रहना चाहिए
एटा,
पिछले पंद्रह दिन से देश में आई फ्लू के मामले में जैसी उछाल देखी जा रही है, वैसे पहले नहीं देखी गई थी। लगभग आधा दर्जन राज्यों को इस बीमारी के मद्देनजर दिशा-निर्देश जारी करने पड़े हैं। क्या आई फ्लू या कंजंक्टिवाइटिस या नेत्रश्लेष्मलाशोध एक वैश्विक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है? आंकड़े बताते हैं कि दुनिया में इस बीमारी के इलाज का चार अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार है। दुनिया के सभी महादेशों में बड़ी संख्या में लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं। इसका जब संक्रमण होता है, तब आंखें लाल हो जाती हैं। खुजली व चुभन होती है और सूजन भी। आंखों से पानी बहता रहता है। यह बीमारी या संक्रमण होने का एक कारण नहीं है। वायरल व बैक्टीरियल संक्रमण, एलर्जी और जलन पैदा करने वाले पदार्थों के संपर्क में आने से भी यह बीमारी हो सकती है। यह संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। भीड़भाड़ वाले इलाकों, दफ्तरों में रहने वाले लोगों और स्कूलों में बच्चों की आंखें लाल होने की आशंका सबसे अधिक होती है। भारत में एक ओर, मौसम अस्थिर है, तो दूसरी ओर, तमाम तरह की गतिविधियां भी बढ़ गई हैं, ऐसे में, आई फ्लू का भय बन गया है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी लोगों को सावधान किया गया है।
ध्यान देने की बात है कि देश के अनेक हिस्सों में लगातार बारिश और बाढ़ की स्थिति के चलते स्वच्छता में भी कमी आई है। उच्च आर्द्रता भी ऐसे रोगों के प्रसार के लिए एक अनुकूल कारक है। क्या कोविड-19 महामारी के बाद लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटी है और उसकी वजह से भी संक्रामक रोगों की आशंका बढ़ गई है? वास्तव में सभी को स्वच्छता बरतने के लिए तत्पर रहना चाहिए। हाथों को साफ रखना भी जरूरी है और अपने चेहरे या आंखों का स्पर्श करने से भी बचना चाहिए। कोरोना के संक्रमण के समय भी यह बार-बार कहा गया था कि अब कुछ वर्षों तक हमें संक्रामक रोगों से कुछ ज्यादा सावधान रहना होगा। वैसे भी वैज्ञानिकों का मानना है कि कंजंक्टिवाइटिस भारत में आम है और ज्यादातर बरसात के मौसम में देखा जाता है। धूप का चश्मा पहनने से संक्रमण को नहीं रोका जा सकता, पर यह किसी व्यक्ति को अपनी आंखों को छूने से रोक सकता है, जो बीमारी के फैलने का एक प्रमुख कारण है। चिकित्सक यह मान रहे हैं कि बारिश का दौर जब तक चलेगा, इस संक्रमण का खतरा बना रहेगा।
डेंगू का खतरा भी इन दिनों बढ़ा हुआ है। अकेले त्रिपुरा जैसे छोटे राज्य में 180 से ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं, वहीं दिल्ली में साल 2018 के बाद सबसे ज्यादा मामले देखे जा रहे हैं। डेंगू एक जानलेवा बीमारी है, अत इसको लेकर ज्यादा चिंता है। यह बीमारी भी जगह-जगह जलभराव और मच्छरों के पनपने से होती है। जाहिर है, यह भी बारिश से जुड़ा संकट है। डेंगू के मरीजों को तीव्र सिरदर्द का अनुभव हो सकता है, जो आंखों में दर्द व असुविधा की स्थिति पैदा कर सकता है। दर्द आमतौर पर आंखों के पीछे केंद्रित होता है और यह डेंगू संक्रमण का एक सामान्य संकेत है, जिससे लोगों को सावधान रहना चाहिए। मांसपेशियों और जोड़ों में अत्यधिक दर्द के चलते डेंगू को अक्सर हड्डी तोड़ बुखार भी कहा जाता है। मतली, उल्टी और पेट में बेचैनी का भी डेंगू से संबंध है। आज के समय में ऐसी मौसमी बीमारियों को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है, क्योंकि एक समस्या की अनदेखी दूसरी समस्या को बढ़ा सकती है।