भुरगंवा में मेले को नहीं मिली अनुमति, पुलिस बल तैनात, रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा,मारहरा, । गांव भुरगंवा का मेला अनुमति न मिलने के कारण नहीं हो सका। गांव में मेले का आयोजन करने वाली समिति व ग्रामीणों पर पुलिस की नजर बनी हुई है। गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। लगातार थाना पुलिस गश्त कर रही है।
भुरगवां में कई वर्ष से तीन दिवसीय मेले का आयोजन हुआ करता था। मेले में ढोला, नौटंकी आयोजन तीन दिन चलता था। बीते वर्ष होली के बाद अष्टमी को लगने वाले मेले में रात्रि में बवाल हो गया था। यह जातीय संघर्ष में बदल गया। दर्जनों लोगों को जेल जाना पड़ा। सैकड़ों पर मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। एक माह तक पिछले वर्ष गांव में पुलिस व पीएसी ने सुरक्षा व्यवस्था संभाली थी। इसे लेकर इस वर्ष मेला समिति ने आयोजन की स्वीकृति प्रशासन से मांगी। मामले को लेकर प्रशासन ने कोई जोखिम उठाना उचित नहीं समझा। मेला पर रोक लगाते हुए गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। गांव में शांतिपूर्ण माहौल बना रहे।
राजनीति से भी नहीं सुलझा बवाल पहुंचा हाईकोर्ट गांव में हुए संघर्ष पर विराम लगाने के लिए जनपद के तीन मौजूदा विधायकों ने कमान संभाली। एक-दूसरे पक्ष ने पुलिस पर पक्षपात की कार्रवाई करने का आरोप लगाया। मामला बैकफुट पर आ गया। इसमें अपने बचाव के लिए आरोपियों ने उच्च न्यायालय की शरण ली। वहां मामला विचाराधीन है।
शासन के संज्ञान लेने पर सुरक्षा व्यवस्था कायम गांव में दो पक्षों में तनाव को लेकर मामला हाईलाइट होने के बाद शासन के संज्ञान में पहुंचा। वहां से बवालियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देंश मिलते ही पुलिस ने एक माह जमकर चाबुक चलाया। तब गांव में शांति का माहौल कायम हुआ।
मेला लगने की डीएम कार्यालय से कोई परमिशन नहीं थी। इसलिए लॉ इन ऑर्डर को लेकर गांव में पुलिस बल तैनात किया गया है।
सुधांशु शेखर, क्षेत्राधिकारी सदर, एटा
मेले की प्रथा का हो चला अंत
तीन दिन शहनाई की तरह गूंजने बाले गांव भुरगंवा में चंद लोगों ने बवाल कर गांव की फिजा को खराब करते हुए मेला समाप्ति का कार्य कर दिया। प्रशासन ने गांव में लगने वाले मेले की अनुमति के लिए हाथ खड़े कर दिए। इससे मेले का अंत हो गया। आगामी वर्षों में सिर्फ यादें बाकी ही रह गईं।