टेंडर लेने में रुचि नहीं दिखा रहे ठेकेदार , रिपोर्ट योगेश मुदगल

एटा, कार्यालय संवाददाता। लोक निर्माण विभाग में टेंडर को लेकर मारामारी रहती थी। आज हालात है कि 20-20 लाख रुपये के ठेके के टेंडर लेने वाला कोई नहीं है। दो-दो बार टेंडर लगने के बाद किसी भी फर्म ने काम करने की हिम्मत नहीं जुटाई। कारण सरकार की नई नीति ठेकेदारों के समझ में नहीं आ रही है।
वर्ष 2023 के वित्तीय वर्ष खत्म होने में मात्र 15 दिन शेष बचे है। विभाग पर पैसा भी है, जो खराब सड़कें है उन्हें सही भी कराना चाहते है। विभाग ने दो सड़कों के लिए तीन-तीन बार टेंडर किए है। इन सड़कों पर काम करने के लिए कोई ठेकेदार टेंडर लेने के लिए ही नहीं आ रहा है। विभाग भी चाहता है कि जो पैसा आया है वह उन सड़कों पर लगकर खर्च हो जाए। नए नियम में उलझे ठेकेदार इस अब इस काम को लेने के लिए तैयार नहीं हो रहे है। सरकार ने नियम लागू किया है कि अब ठेकेदार को विभाग से तारकोल नहीं मिलेगा। उसे अपना तारकोल आईओसी से मगाकर लाना होगा। सड़क में जितना डामर लगाया है उसका बिल लगाने के बाद भी भुगतान हो सकेगा। इसके अलावा जो मशीनें सड़क निर्माण आदि कराने काम करती थी उनपर भी जीपीआरएस लगाए जाने की सूचनाएं आ रहे है। छोटे ठेकेदार को काम करना मुश्किल होता जा रहा है। उसे अब काम करने के लिए अधिक पैसे का व्यव करना होगा।
दो सड़कों के लिए दो-दो बार टेंडर हो चुके है। किसी भी ठेकेदार ने इन टेंडरों को खरीदा ही नहीं है। ऐसे में काम रूका हुआ पड़ा है। विभाग नए कार्यों पर तारकोल देना बंद कर दिया है। ठेकेदार को काम करने के लिए अपना तारकोल लाना होगा।
मुजाहिद अख्तर, एक्सईएन, लोक निर्माण विभाग प्रथम