नेक मन से होली खेलें
भारतीय संस्कृति में साल के 365 दिनों में 730 से अधिक पर्व-त्योहार होते हैं। इनमें से हरेक पर्व-त्योहार का हमारे जीवन में अनुपम महत्व है और इनसे कोई न कोई प्रेरणादायी दृष्टांत भी जुड़ा होता है। त्योहारों के माध्यम से पूरे समाज को एकजुट कर हम अपने मूल्य, संस्कार, अपनी परंपरा व गौरवशाली विरासत को संरक्षित करते हैं और उनको एक से दूसरी पीढ़ी को सौंपते हैं। दीपावली के अवसर पर पूरा भारत जगमगाता है, तो होली के अवसर पर यह रंगीला हो जाता है।

होली का त्योहार हमें स्मरण कराता है कि पुराने गिले-शिकवे मिटाकर हम एक-दूसरे के गले मिलें, एक नई शुरुआत करें, ताकि समाज और राष्ट्रीय स्तर पर एकता व शांति का संदेश प्रसारित हो सके। हमारा देश हमें सब कुछ देता है, हम भी तो उसे कुछ देना सीखें। इसलिए हम सब देशवासी मिलकर उसकी सृमद्धि में अपना-अपना योगदान दें। और यह तभी होगा, जब हमारे जीवन में प्रेम व एकता के रंग परवान चढ़ेंगे और हम अपने वतन को एकता के सूत्र में बांधे रखेंगे।
होली के रंगों का यही संदेश है कि भेदभाव, ऊंच-नीच, जात-पात आदि की दीवारों को गिराते हुए सब बस प्रेम के भाव में रंग जाएं। जीवन के रंगमंच पर भी हम समस्त भेदभावों को भुलाकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जिसमें समरसता हो, सद्भाव हो, प्रेम हो, शांति और बंधुत्व हो। तो आइए, हम सभी एक मन और नेक मन से होली खेलें। होलिका दहन के लिए देश भर में हर साल कई पेड़ काट दिए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर लकड़ियों को जलाने से वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। अत होलिका दहन के लिए गोबर के उपलों का प्रयोग होना चाहिए, ताकि पेड़ों का संरक्षण हो सके। गाय के गोबर से बने उपलों के प्रयोग से गोवंश का भी संरक्षण होगा और हमारी परंपराएं भी जीवंत व जागृत बनी रहेंगी।
याद रखिए, जिस दिन धरती का प्रत्येक मनुष्य जातिवाद, नस्लवाद, संप्रदायवाद, भेदभाव आदि की दीवारों को तोड़कर और नफरत की दरारें पाटकर एकता, समरसता और सद्भाव के रंगों में रंग जाएगा, उस दिन विश्व में बंधुत्व की स्थापना होते देर न लगेगी। भारतीय संस्कृति तो वसुधैव कुटुंबकम् के सार्वभौमिक परिवार के सूत्र को आत्मसात कर आगे बढ़ने का संदेश देती है, इसलिए इस संस्कृति में व्याप्त पर्व-त्योहारों की मिठास; गुलाल में छिपे आपसी प्रेेम और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को आत्मसात कर जीवन में आगे बढ़ते रहना चाहिए। निश्चित रूप से होली एक स्वर्णिम अवसर लेकर आता है। होली अर्थात हो ले, हम सब एक-दूसरे के हो लें। यही तो सकारात्मक क्रांति है। होली का त्योहार हमें क्रूरता पर प्रेम, अहं पर भक्ति और अन्याय पर न्याय की जीत का संदेश देता है।