जंतर मंतर बना वन रैंक वन पेंशन का जंगी मैदान

जंतर मंतर बना वन रैंक वन पेंशन का जंगी मैदान!! लाखों पूर्व सैनिक विभिन्न राज्यों से पहुंचे नई दिल्ली और अपनी मांगों को लेकर किया जंगी प्रदर्शन- कैप्टन राज द्विवेदी वरिष्ठ उपाध्यक्ष भारतीय मीडिया फाउंडेशन सैनिक फोरम की कलम से

भारत सरकार के सामने एक बहुत बड़ी चुनौती वन रैंक वन पेंशन लागू करने की रही है इसके लिए पूरे देश के सैनिक पिछले कई वर्षों से आवाज उठा रहे थे लेकिन भारत सरकार चाहे कांग्रेस की रही हो चाहे भारतीय जनता पार्टी अथवा चाहे जनता दल की सरकार रही सभी सरकारे केवल टाइम पास किया और किसी ने भी इस विषय को गंभीरता से नहीं लिया जबकि यह मांग 1971 के बाद से शुरू हुई थी लेकिन किसी भी सरकार ने इस विषय को गंभीरता से नहीं उठाया और यह आवाज लगातार भारत सरकार के मानस पटल और संसद में गूंजती रही कभी-कभी राज्यसभा में भी विपक्षी पार्टियों ने मुद्दा उठाया था लेकिन वह संसद और राज्यसभा की दीवारों में टकराकर ध्वनि परिवर्तन अंदर ही अंदर होता रहा और उस आवाज को प्रत्येक भारत सरकारें अपने अपने शासनकाल में इस विषय पर टालमटोल करती रही और उसका दुष्परिणाम आज हमारे सामने जंतर मंतर में दिखाई पड़ रहा है भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 2014 की एक पूर्व सैनिक रैली के अंदर पहुंचकर सभी जवानों को उद्बोधन करते हुए कहा था कि हम सिपाही लांस नायक, नायक और हवलदार को सबसे ज्यादा पेंशन देंगे लेकिन जब पेंशन बहाल किया गया तब यह पाया गया कि जवानों के साथ धोखा किया गया और केवल अफसरों को सबसे ज्यादा वन रैंक वन पेंशन का लाभ दिया गया इस विषय को लेकर पूर्व सैनिक पेंशनर जंतर मंतर में पहुंचकर अपनी आवाज को बुलंद किया और यह डिमांड जो पूर्व सैनिकों ने जंतर-मंतर में आकर किया उससे लगता है कि जो आक्रोश हमारे पूर्व सैनिकों के अंदर अब देखा जा रहा है वह पहले नहीं था क्योंकि जवान अपने अफसर के ऊपर अंधविश्वास करता है और उस अंधविश्वास को अफसरों ने कमजोरी समझ लिया और उस कमजोरी का पूरा फायदा वन रैंक वन पेंशन लेने के लिए भारत सरकार की आंखों में धूल झोंका और भारत सरकार ने इन विसंगतियों को पूरा करने के लिए कहा लेकिन उसको पीसीडीए द्वारा जब जारी किया गया तब अफसरों को सबसे ज्यादा लाभ मिला और बाकी हमारे पूर्व सैनिकों के प्रति भेदभाव हुआ क्योंकि हमारे जवान पहले से भी जानते थे कि हमें पेंशन नहीं दी जाएगी क्योंकि इसमें अफसर अपना पूरा लाभ लेगा और वही हुआ जो पहले जवानों ने सोचा था और जो फैसला आज हमारे जवानों ने लिया वह बिल्कुल उनकी मांग जायज है और बिल्कुल तथ्यों पर आधारित है इसी के साथ हमारे पूर्व सैनिकों ने डिसेबिलिटी पेंशन से संबंधित जानकारी देते हुए कहा कि जब कोई जवान कर्तव्य निभाते हुए अपने किसी भी अंग को खो देता है तो उसको बहुत ही कम डिसेबिलिटी पेंशन दी जाती है लेकिन जब कोई अफसर इसी रास्ते से गुजर जाता है तो उसको सबसे ज्यादा पेंशन दी जाती है इस विषय को भी बड़ी गंभीरता से पूर्व सैनिकों ने जंतर-मंतर में उठाया है और वह वास्तव में बिल्कुल सही है जवान और अफसरों को एक ही श्रेणी में रखना चाहिए क्योंकि दोनों ने अपने अपने कर्तव्यों को पूरा किया और दोनों के अंग एक जैसे हैं और जब डिसेबिलिटी पेंशन अफसरों को ज्यादा मिलती है और जवानों को कम दिया जाता है तो यह भेदभाव और सौतेला व्यवहार भारत सरकार क्यों करती है क्योंकि जो कानून भारत सरकार संसद भवन में करती है वहीं कानून भारतीय सेना के अंदर जाता है भारतीय सेना के किसी भी अधिकारी अपने तरफ से कोई कानूनी बनाता है इसलिए जब तक कानून में संशोधन नहीं होगा तब तक जवानों को बराबर हक नहीं मिलेगा इसी के साथ साथ जब कोई भारतीय जवान अथवा ऑफिसर ड्यूटी के दरमियान शहीद होता है तो यहां भी बड़ी विसंगतियां पाई जाती है अफसर की पत्नी को लाखों रुपया पेंशन दी जाती है और जवानों की पत्नी को ₹14000 में सीमित कर दिया जाता है ऐसा क्यों किया जाता है इस विषय को भी हमारे पूर्व सैनिक संगठनों ने बड़ी बारीकी से बताया है कि हमारे परिजनों को जिनके पति नहीं है उनके बच्चों के सामने कितनी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जबकि दोनों परिवारों की डिमांड एक ही तरह की होती है यह भेदभाव क्यों किया जाता है भारत सरकार को इसका उत्तर देना चाहिए क्योंकि दोनों के सामने एक ही प्रकार की समस्या होती है जवानों के परिजनों को एक ही कैटेगरी में रखना चाहिए इस प्रकार की विसंगतियों को दूर करना होगा तभी बराबर पेंशन के हकदार माना जा सकता है अन्यथा इस प्रकार की आवाज जंतर मंतर मैदान में गूंजती रहेगी !
हमारी भारतीय सेना के जवान भी हसन शासित होते हैं और जब वह आवाज उठाते हैं तो उनकी आवाज बहुत दूर तक जाती है उनकी आवाज को कोई रोक नहीं पाएगा लेकिन कुछ ऐसे तत्व हैं कुछ ऐसे सलाहकार हैं जो भारत सरकार की कानों तक नहीं पहुंचेगी क्योंकि हमारे चौथा स्तंभ जो मीडिया है वह चुपचाप रहता है अथवा उसको चुपचाप करा दिया जाता है ! यदि सही सिपहसालार कार वन रैंक वन पेंशन के लिए भारत सरकार रक्षा मंत्रालय को सही राय देते तो यह धरना प्रदर्शन आज 20 फरवरी को नहीं होता यह उन सैनिकों की पीड़ा है जिन्होंने अपने पूरा जीवन भारतीय सेना के साथ समर्पण कर देश की एकता और अखंडता की रक्षा की है वृद्ध सैनिक कभी नहीं होता है वह जवान रहता है और इसीलिए उसको वेटरन कहा गया है हम सैनिक कभी बूढ़े नहीं होते हैं हम देश के लिए मरते हैं देश के लिए जीते हैं और देश के लिए अपना सर्वोच्च न्योछावर कर देते हैं वहीं जवान जिन्होंने कसम खाई थी देश की सेवा करने के लिए अब वह वृद्ध देखने में बेशक हैं लेकिन वह जवान है इसलिए भारतीय सेना को जवान कहा गया है इसी पीड़ा को लेकर के 20 फरवरी जंतर मंतर जंगी मैदान बना और पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश जम्मू कश्मीर केरल तमिलनाडु महाराष्ट्र बिहार गुजरात उड़ीसा और नार्थ ईस्ट लंबी दूरी से पूर्व सैनिक जंतर मंतर नई दिल्ली और गोवा दमन दीप से पहुंचकर अपने अलग-अलग संगठनों के माध्यम से भारत सरकार के सामने वन रैंक वन पेंशन बराबर देने की डिमांड को पूरी जोर के साथ जंगी प्रदर्शन किया और अपने अपने तरीके से अपने अपने डिमांड को पूरा करने के लिए भारत सरकार के सामने रखा लेकिन दुर्भाग्य है कि नेशनल चैनल जंतर मंतर नई दिल्ली नहीं पहुंचा और इस विषय को ऐसा लग रहा है कि भारत सरकार के माध्यम से नेशनल मीडिया को चुप्पी साधने के लिए कह दिया गया है जबकि सोशल मीडिया के अंदर तो काफी लोग आपस में एक दूसरे की आवाज को रिकॉर्ड करते रहे सोशल मीडिया के माध्यम से अपने अपने ग्रुप में भेजते रहे परंतु राष्ट्रीय चैनल के माध्यम से जिस प्रकार से कवर करना चाहिए उस प्रकार से नहीं किया गया और यहां हमें लगता है कि भारत सरकार बड़े-बड़े मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रिंट मीडिया को पहले से ही मुंह बंद कर दिया जिस कारण राष्ट्रीय चैनलों में कोई भी न्यूज़ नहीं प्रसारित की गई है और इसीलिए कोई भी नेशनल चैनल जंतर-मंतर में नहीं पहुंचे और हमारे पूर्व सैनिकों की आवाज को दबाने का एक तरफ भरपूर प्रयास किया जा रहा है भारतीय मीडिया फाउंडेशन इस समाचार को पूरे हिंदुस्तान के हर वर्ग तक पहुंचाने के लिए अपने बात को दोहराते हुए आगाज कर रहा है कि हम पूर्व सैनिकों की आवाज को भारत सरकार के कानों तक अवश्य पहुंचाएंगे और जितनी भी जायज मांगे पूर्व सैनिकों द्वारा उठाए जा रही है उसको भारत सरकार के मानस पटल पर मंथन करने के लिए भारतीय मीडिया फाउंडेशन अपनी पूरी ताकत से पूर्व सैनिकों की आवाज को उठाता रहेगा और जिस प्रकार से जंगी प्रदर्शन हमारे पूर्व सैनिकों ने जंतर-मंतर में पहुंचकर के किया है वह डिमांड नहीं है बल्कि वह एक बुलंद आवाज है जो आगे चलकर भारतीय सेना के अंदर भी खलबली पैदा कर सकती है क्योंकि जो डिमांड हमारे पूर्व सैनिक भाई जंतर मंतर में पहुंचकर किया है वह बिल्कुल सत्य है उसमें हमारे जवान बड़े ही अनुशासित ढंग से भारत माता की जय राष्ट्रीय तिरंगा झंडा को लहराते हुए प्रधानमंत्री मोदी जी से डिमांड कर रहे हैं कि जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने यह वादा किया था की वन रैंक वन पेंशन जवानों को केवल मिलेगी तो फिर अफसरों को केवल लाभ क्यों दिया गया यह सोचने का विषय है !
हमारे जवान विभिन्न राज्यों से अलग-अलग शहरों से अलग-अलग गांव से आकर के जिस प्रकार से एकता और अनुशासन का साथ जंतर मंतर में पहुंचे हैं वह काबिले तारीफ है और निश्चित तौर पर है उनकी डिमांड को अवश्य भारत सरकार मानेगी और ज्यादा से ज्यादा लाभ हमारे जवानों को दिया जाएगा इसी के साथ साथ हमारे पूर्व सैनिकों ने वन रैंक वन पेंशन के अलावा एमएसपी वेतन कोई भी एक कपट और छलावा बताते हुए पूर्व सैनिकों ने भारतीय मीडिया फाउंडेशन को बताया कि एमएसपी वेतन में सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है यह भारत सरकार करना ही चाहती है तो जवानों के बराबर अफसरों को भी एमएचपी वेतन दिया जाए और यदि ऐसा नहीं हो सकता तो फिर जवानों की भी एमएसपी वेतन अफसरों के बराबर किया जाए और इसी के साथ एक पूर्व सैनिकों ने डिसेबिलिटी पेंशन को बराबर करने की मांग को दोहराया और उन्होंने बताया कि डिसेबिलिटी पेंशन जवानों को बहुत ही कम दी जाती है और अफसरों को सबसे ज्यादा डिसेबिलिटी पेंशन दी जा रही है क्योंकि इसमें भी केवल ऑफिसर कैटेगरी को ज्यादा पेंशन दी जा रही है और निम्न स्तर के रैंक को बिल्कुल इससे अलग कर दिया गया है!
इसी मांगों को लेकर के हमारे पूर्व सैनिक जो कभी भारत-पाकिस्तान 1971 की लड़ाई में अपने देश की आन बान शान के लिए दुश्मनों को मार भगाया और उसी के साथ साथ कुछ ऐसे सैनिक भी इस जंतर-मंतर में उपस्थित हुए जिन्होंने 1962 की लड़ाई लड़ी थी 1965 की लड़ाई लड़ाई के दौरान दुश्मन के दांत खट्टे किए थे और कई पूर्व सैनिक कारगिल युद्ध में भी हिस्सा लेकर दुश्मनों को भगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी और जिन्होंने सियाचिन ग्लेशियर के माइनस 55 डिग्री सेल्सियस के अंदर जिन्होंने अपना शरीर का कुछ हिस्सा भारत माता की रक्षा करते समय गवा दिया ऐसे भी जवान जंतर-मंतर में देखे गए क्योंकि वह चाहते हैं कि हमारा हक मिले और जब हमारा हक नहीं मिलेगा तो फिर हम किस प्रकार से अपने परिवार का पालन करेंगे क्योंकि जवानों और अफसरों का एक जैसा ही परिवार होता है दोनों को महंगाई की मार झेलनी पड़ती है इसलिए दोनों को बराबर हक मिलना चाहिए इसमें कोई भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि दोनों अपने कर्तव्यों की बलिवेदी पर काम करते हैं और दोनों परिवार की विसंगतियां एक जैसी है फिर भेदभाव क्यों इस विषय को भी बड़ी गंभीरता से पूर्व सैनिकों ने जंतर मंतर पर उठाया है और भारत सरकार से मांग किया है की डिसेबिलिटी पेंशन बराबर होना चाहिए पूर्व सैनिकों ने लगभग एक ही आवाज में जंतर मंतर से भारत सरकार को घेरा है और अब भारत सरकार की क्या मानसिकता है यह अब आगे वक्त बताएगा लेकिन पूर्व सैनिक हटने के लिए तैयार नहीं है जब तक उनकी डिमांड पूरी नहीं होगी तब तक वह जंतर मंतर पर अपनी मांगों को लेकर लंबी पारी खेलने के लिए तैयार हो गए हैं और जब तक जंग जीत नहीं जाएंगे तब तक वह मैदान नहीं छोड़ेंगे क्योंकि सैनिक जब अपना मिशन की तैयारी कर लेता है तो वह उस मिशन को जीत करके ही वापस लौटता है ऐसा ही कुछ हमारे पूर्व सैनिक संगठनों ने योजनाबद्ध तरीके से one rank one pension का हक हमें मिलकर रहेगा इस विषय पर लंबी पारी करने के लिए राजी हो गए हैं और यह पारी लंबी खेली जा सकती है क्योंकि भारत सरकार जल्दी इस विषय को नहीं मानेगी क्योंकि एक वर्ग को दिया गया और दूसरे वर्ग के साथ छलावा किया गया और जब भारत सरकार के कानों तक पहुंचेगी तब तानाशाही को बढ़ावा देने के लिए कुछ सलाहकार ऑफिसर केवल अपना फायदा उठाने के लिए फिर से भारत सरकार को उल्टा पुल्टा कराने के लिए कहेंगे लेकिन पूर्व सैनिक समझ गए हैं कि हमारे साथ छलावा हुआ है छल कपट के साथ वन रैंक वन पेंशन का लाभ केवल अफसरों को दिया गया है और जवानों के साथ केवल छलावा किया गया है और अब जवान समझ गए हैं कि अपना हक हम लेकर रहेंगे अफसरों के साथ हमारा कोई समझौता नहीं होगा यह भारत सरकार यदि वास्तव में सैनिकों के प्रति वफादार है तो फिर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं क्योंकि जवान अपने ऑफिसर के ऊपर बहुत ही विश्वास करता है उसके बावजूद उसके साथ छल किया गया जो पूर्व सैनिकों के लिए और नारियों के लिए तथा डिसेबिलिटी पेंशन प्राप्त करने वाले उन तमाम पूर्व सैनिक पेंशनर्स के लिए असहनशील हो गया हैऔर इसी बीच इसी विषय को लेकर हमारे समस्त पूर्व सैनिक अलग-अलग राज्यों से जंतर मंतर में एकीकृत होकर भारत सरकार से मांग कर रहे हैं और हमें लगता है कि अब यह आंदोलन अनवरत चलेगा क्योंकि इतना जल्दी भारत सरकार मानने वाली नहीं है वह अपने चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है और हम यहां बड़ी गंभीरता से लिख रहे हैं कि यदि हम भारतीय सेना के इतिहास को देखें तो भारतीय सेना पराक्रम और ऊर्जा से भरी हुई है हमारे जवान अपने अफसरों के ऊपर बेहद विश्वास करते हैं परंतु आप ही सर इसी विश्वास का नाजायज फायदा उठाने के लिए यह बता अपना लाभ और अपना हित सोचते रहते हैं इसीलिए भारत सरकार केवल ऑफिसर को ही पूरा लाभ देने के लिए लालायित रहती है और अक्सर यह देखने को मिल रहा है कि अफसरों को जवानों की अपेक्षा पूरी फैसिलिटी दी जाती है और आगे भी दी जाती रहेगी क्योंकि अफसरों को पूरा पावर दे दिया गया है और उसके नीचे जो जूनियर कमीशन ऑफिसर के पदों में बैठे हुए लोग होते हैं वह जवान की पीड़ा को बहुत अच्छी तरह से समझते हैं लेकिन उनको सिग्नेचर पावर से दूर रखा गया है इसी कारण से ऑफिसर ऑफिसर के लिए पूरा लाभ पहुंचाता है और जवानों की तरफ बिल्कुल नहीं देखता है और वही आगे चलकर कानून बन जाता है भारतीय मीडिया फाउंडेशन सैनिक फोरम सदैव भारतीय सैनिकों के वफादारी इमानदारी और उसके साथ जो भेदभाव हो रहा है इस विषय को बड़ी गंभीरता से उठाएगा और चाहे वह वन रैंक वन पेंशन हो अथवा चाहे कोई भी जायज और अनुशासित मांग जब फ्री पूर्व सैनिकों एवं उनके परिवार द्वारा द्वारा उठाई जाएगी तो इस विषय को भारत सरकार के कानों तक पहुंचाने के लिए अपनी पूरी शक्ति का प्रदर्शन करेगा और भारतीय मीडिया फाउंडेशन भारत सरकार से आग्रह करता है की वन रैंक वन पेंशन का जो हक हमारे जवानों को मिलना चाहिए उसको तत्काल प्रभाव से देने के लिए निर्देश जारी करें और भारतीय सैनिकों के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव भविष्य में न हो इस विषय के लिए भारतीय सेना के अंदर भी जो नियम कानून अंग्रेजी हुकूमत के चल रहे हैं उनमें बदलाव लाया जाए और जिस प्रकार से हमारी भारतीय सेना पूरे विश्व की सेनाओं में प्रसिद्ध है उस इतिहास को दोहराने के लिए हमारे जवानों को और उनके परिजनों को उनका हक देना होगा इसमें किसी भी प्रकार का छल कपट नहीं होना चाहिए क्योंकि अब जवान और अफसर दोनों शिक्षित हैं दोनों पढ़े-लिखे हैं दोनों का एजुकेशन एक जैसा है और अब अंग्रेजी सेना नहीं है बल्कि भारतीय सेना है और भारतीय सेना के चाहे जवान हो अथवा अफसर हो वह सामान्य परिवारों से ही जाते हैं दोनों के परिवार एक जैसे हैं अब न तो राजाओं के लड़के जाते हैं और ना ही नवाबों के लड़के जाते हैं और ना ही किसी सांसद और विधायक के जाते हैं अथवा न तो कोई आईएस का बेटा और न तो आईपीएस का बेटा सेना में जाता है यदि सेना में जाते हैं तो वह सामान्य परिवार के लोग जो देश और समाज के लिए समर्पित होते हैं उन्हीं के बच्चे जाते हैं और अब धीरे-धीरे एक चलन हो गया है कि चाहे वह जवान का लड़का हो चाहे वह ऑफिसर का लड़का हो दोनों के बच्चे पहले भारतीय सेना का ही चुनाव करते हैं जब भारतीय सेना में नहीं चुने जाते तब वह किसी अन्य नौकरियों के लिए अपना भविष्य उज्जवल करते हैं लेकिन उसमें भी बहुत कम प्रतिशत जवानों के बच्चों को स्थान दिया जाता है हमारे सभी गबरू जवान भारतीय गांवों से आते हैं और भारत के गांव की आत्मा एक जैसी है हमारे जवानों के अंदर कोई छल कपट नहीं होता है और जब वह सेना में जाते हैं तो वह सेना के अंदर के जो प्रोटोकोल है जो अंग्रेजों के बनाए हुए हैं उन्हीं नियमों पर चलना प्रारंभ कर देते हैं और उसी लॉ एंड औरतों का पूरा लाभ ऑफिसर कैटिगरी उठाना प्रारंभ कर देती है और जवानों के ऊपर कमांड और कंट्रोल करने लगती है और यहां पर सबसे बड़ी गलती तो हमारी भारत सरकार की है और भारतीय सेना के उच्च पदों पर बैठे हुए उनकी है जिन्होंने अभी तक अंग्रेजी हुकूमत द्वारा जो जारी किए गए निर्देश है उनको खत्म नहीं किया गया और अंग्रेजी हुकूमत के दौरान जो कानून और जो फोटो को आप सेना के अंदर चलाते थे उसी को आज के अधिकारी भारतीय सेना के अंदर चला रहे हैं जो सर्वथा गलत है भारत सरकार को चाहिए कि अब उन तमाम कानूनों को जला देना चाहिए और वर्तमान दौर में जिस प्रकार से हमारी भारतीय सेना की परंपरा चली आ रही है उस विषय पर पड़े तरीके से नया कानून बनाना चाहिए जिससे सभी पदों को समान अधिकार और समान लाभ मिले इसलिए संसद में एक नया कानून बनना चाहिए जिससे सभी को बराबर लाभ और बराबर हक मिले तभी यह भारतीय सेना आगे चलकर अपनी चुनौतियों का सामना करेगी !
भारतीय मीडिया फाउंडेशन सदैव भारतीय सैनिकों और भारतीय पूर्व सैनिकों तथा समस्त वीर नारियों के साथ में कंधे से कंधा मिलाकर काम करती रहेगी और आपकी आवाज को बुलंद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी जंतर मंतर में चल रहे आंदोलन को पूरी तरह से कवर करती रहेगी और जो डिमांड पूर्व सैनिक संगठनों द्वारा उठाया जाएगा वह आवाज बनकर भारत सरकार की कुंभकरण की नींद को जगाता रहेगा भारतीय मीडिया फाउंडेशन सदैव भारतीय सेना के साथ में कंधे से कंधा मिलाकर काम करता रहेगाऔर पूर्व सैनिकों की आवाज को भारत सरकार तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगा!

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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