दैनिक क्यों न लिखें सच
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आवारा पशु नीलगाय कर रही हैं फसल को रातो रात बर्बाद किसान की मुश्किल बढ़ती दिखाई दे रही है सदियों से इस देश का पालनहार किसान कभी वर्षा के कारण कभी सूखे के कारण कभी फसल पैदावार ना होने के कारण यूं ही अपना जीवन खेत में पौड़ी पौड़ी कर गन्ना उगाता है लेकिन देश के अभागे किसान को ना रात चैन है ना दिन चैन है अफसोस इस देश का भाग्य किसान की किस्मत में शायद यही लिखा है कभी ना चैन से सोया कभी ना चैन से जागा यह तो है किसान और मजदूर इसे बोझ ही उठाना निराश किसान ने बताया हमारे संवाददाता ने जब एक किसान भाई से बात की तब चिंता व्यक्त करते हुए
इस देश के पालनहार किसान ने बताया हम सदियों से यूं ही अपना जीवन यापन करते चले आ रहे हैं किसान कड़ी धूप मैं रहकर देश के लिए अच्छी फसल पैदावार करने की पूरी कोशिश करता है लेकिन दुर्भाग्य से किसान प्राकृत मार्को को झेल ता चला रहा है किसान रात दिन धूप में ढोल पर मेहनत कर दो वक्त के गुजारे के लिए अपना जीवन रात दिन मेहनत करने में लगा देता है जब फसल पैदावार का समय आता है तब किसान आस उम्मीद लगाता है इस बार फसल अच्छी होगी अच्छे दिन आएंगे हम भी बिटिया की शादी रचाएंगे लेकिन लेकिन देश का अभागा किसान दुर्भाग्य के कारण कभी वर्षा के कारण कभी फसल पैदावार ना होने के कारण यूं ही तकदीर के लिखे से मजबूर होकर निराश ही राश होकर बैठ जाता है फिर भी किसान यूं ही मेहनत करता चला रहा है किसान यूं ही अपना खून पसीना ढोल पर बहता रहेगा देश आगे जाता रहेगा