किसानों की आय बढ़ाने के कुछ व्यावहारिक उपाय, रिपोर्ट योगेश मुदगल

किसानों की आय बढ़ाने के कुछ व्यावहारिक उपाय, रिपोर्ट योगेश मुदगल

किसान देश के विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसकी मजबूती पूरे देश को मजबूत करती है। बार-बार चर्चा होती है कि किसानों की संख्या घट रही है, तो फिर कोशिशें भी हो रही हैं कि किसानों की आय को किसी तरह से बढ़ाया जाए। आज किसान दिवस पर किसानों की आय बढ़ाने के कुछ उपायों की चर्चा जरूरी है।

पहला उपाय, छोटे किसानों के लिए सबसे जरूरी है कि वे ज्यादा कीमत वाली फसलों की ओर मुखातिब हों, जैसे सब्जियां, शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरी इत्यादि की खेती फायदेमंद साबित हो रही है। सब्जियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। मध्य वर्ग विकसित हो रहा है, शहरीकरण हो रहा है, तो मांग बढ़नी ही है। छोटे किसानों को इस मांग की पूर्ति की ओर मुड़ जाना चाहिए।

दूसरा उपाय है, आज किसानों का एकत्रित और संगठित होना बहुत जरूरी है। कई जगह ऐसे किसान संगठन या संस्थाएं बन रही हैं। इसके लिए भारत सरकार की योजना भी है, तो किसानों को अपने आसपास पता करना चाहिए। जहां भी किसान संगठित हो रहे हों, वहां से जल्द से जल्द जुड़ जाना चाहिए। यही भविष्य है। आने वाले चार-पांच साल में अर्थव्यवस्था में जो बदलाव होगा, व्यवस्था संचार के आधार पर चलेगी। 5जी केवल संचार क्षेत्र में ही बदलाव नहीं लाएगा, यह किसानों को भी आपस में और अन्य कृषि संगठनों, बाजार इत्यादि से ज्यादा बेहतर तरीके से जोड़ देगा। संचार का लाभ लेने के लिए भी किसानों को अपने आस-पास बन रहे किसान-व्यापारिक संगठन से जुड़ना पड़ेगा।

तीसरा उपाय है, जल प्रबंधन। अभी ज्यादातर जगह किसानों को अकेले ही जल का इंतजाम करना पड़ता है। अब जल के लिए गांव भर के किसानों को सामूहिक रूप से योजना बनानी पड़ेगी। मेड़ों के अंदर-अंदर पाइप बिछाकर हर खेत तक सिंचाई का प्रबंध करना होगा। जिस खेत में पानी की जरूरत पड़ेगी, उस खेत के नल को बस खोलने की देर रहेगी। यह जलापूर्ति तंत्र सेंसर आधारित हो जाएगा। किसानों को समझना होगा, जलवायु परिवर्तन की वजह से भी पानी की दिक्कत आने वाली है। गांवों में सौर ऊर्जा आधारित सामूहिक सिंचाई व्यवस्था बनाने की ओर भी बढ़ना पड़ेगा।

चौथा उपाय है मशीनीकरण। अभी भी मशीनीकरण की रफ्तार बहुत धीमी है। ट्रैक्टर पर हमने खुद को रोक रखा है, छोटी मशीनें बहुत सारी हैं। बुआई, गोड़ाई, कटाई इत्यादि के लिए स्मार्ट मशीनों को अपनाना होगा। कोई भी अगर सोच रहा है कि वह तकनीक को रोक लेगा, तो वह कभी कामयाब नहीं होगा। मानव के विकास में तकनीक का विकास शामिल है और तकनीक के विकास में कृषि विकास।

पांचवां उपाय, राज्य सरकारों को भूमि सुधार करने की जरूरत है। चकबंदी हुए दशकों बीत गए, खेत फिर छोटे हो गए हैं, बिखर गए हैं। आज फिर चकबंदी की जरूरत है। देश के अनेक राज्यों में इस वजह से किसानों को समस्या होने लगी है, समाधान सरकारों को जल्द से जल्द करना चाहिए। पट्टा और बटाईदार कानून की भी जरूरत है। ऐसे कानून के न होने से कृषि में जो निवेश होना चाहिए, वह रुका हुआ है। आज आप लंबे समय तक खेती के लिए जमीन लीज पर नहीं ले सकते। पट्टे पर जमीन लेकर बहुत लोग खेती कर रहे हैं। जो जमीन मालिक दिल्ली-मुंबई में बैठा है, वह किसान नहीं है, जो लीज पर लेकर खेती कर रहा है, वह किसान है, इस किसान की चिंता करनी चाहिए। अच्छी नीति आएगी, तो निवेश भी आएगा, साथ ही, आधुनिकीकरण भी तेजी से हो पाएगा।

छठा उपाय, मैंने कई बार किसानों को देखा है, मौसम विभाग से आई सूचना का मजाक उड़ाते। बारिश की आशंका पर फसल ढकने के बारे में सोचना होगा। लोग समझ रहे हैं, ज्यादा तापमान के कारण सरसों में दाना नहीं बैठ रहा है, बाद में पता चलता है कि ज्यादा तापमान की सूचना तो आई थी, पर किसान ने ध्यान नहीं दिया।

सातवां उपाय, अब महिलाएं कृषि में बहुत ज्यादा आ गई हैं, उनके अनुरूप मशीनें बनाने की जरूरत है। महिला कृषकों तक पूरी मदद पहुंचनी चाहिए। निस्संदेह, किसानों को देश से अपना यथोचित मांगते रहना चाहिए। आर्थिक आय इतनी तो हो जाए कि किसान अपने परिवार के साथ प्रतिष्ठित जीवन बिता सकें।

ये लेखक के अपने विचार है

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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