विश्व की एक मात्र पुस्तक जिसका जन्म दिवस मनाया जाता

गीता जयन्ती 4दिसंबर


विश्व की एक मात्र पुस्तक जिसका जन्म दिवस मनाया जाता है !गीता विश्व का एक मात्र ग्रन्थ है जिसके सम्मान के लिए इसके नाम के आगे श्रीमद् शब्द लगा है [भागवत के अतिरिक्त ] गीता अर्थात ७०० श्लोक में गुम्फित जीवन जीने की सरल सहज अद्भुत कला!मत संप्रदाय से परे ज्ञान भक्ति वैराग्य की त्रिवेणी गीता!
आशा निराशा, जय पराजय ,हर्ष ,विषाद ,सुख दुःख ,मान अपमान के तिमिर के बीच खड़ा हुआ एक गगन चुम्बी आलोक पुंज गीता!संशय से शुरू होकर जिज्ञासा के रास्ते से गुजरकर समाधान तक पहुँचने वाला जीवन का अमृत काव्य गीता!गांधी को यह माता दिखती है तो विनोवा को गीताई ..,तिलक को कर्म रहस्य समझाने वाली गीता, यदि वारेन हेनस्तिग्स को चमत्कृत करती है तो चार्ल्स विल्किंस इसे पढ़ने के लिए संस्कृत सीखने को विवश होते हैं और फिर सर एडविन आर्नोल्ड इसका सोंग सिलेस्टियल के नाम से अनुवाद करते हैं!
केथोलिक ईसाईयों के स्टेनफोर्ड विश्व विद्यालय ने गीता को प्रबंधन के कोर सब्जेक्ट के रूप में चुना है!सारा ज्ञान देने के बाद भी अर्जुन को इसे मानने को श्री कृष्ण बाध्य नही करते वे कहते हैं(यथेच्छसि तथा कुरु :]) अर्थात जैसा उचित लगे वैसा करो!अन्य मजहब से गीता यहीं अलग हो जाती है वह अपने सिद्धांत को थोपती नहीं है!धर्मान्धता सम्प्रदाय वाद से सर्वथा मुक्त हो जाती है गीता!..मेक्समूलर हक्सले ईशरवुड ,इसके भक्त बन जाते हैं!आइये हम गीता पढ़ें ,गीता पढ़ायें …गीता जयंती पर गीता का प्रचार प्रसार करें ,गीता की पुस्तक इसे आदर देने वालों को दान करें !विद्यालयों में गीता पर व्याख्यान हों ,वाद विवाद प्रतियोगिता आयोजित कराएं ..और मानव को तनाव मुक्त जीवन जीने की कला से परिचित होने में सहभागी बनें!!?
निवेदक _डॉ. ध्रुवेन्द्र भदौरिया ❤?

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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