आयुष घोटाला जांच के नाम पर मिटा दिए सबूत
नीट मेरिट में छेड़छाड़ कर मेधावियों को पीछे धकेला

नोडल एजेंसी ने दाखिलों से संबंधित गोपनीय डाटा से की छेड़छाड़
आयुष घोटाला जांच के नाम पर मिटा दिए सबूत
नीट मेरिट में छेड़छाड़ कर मेधावियों को पीछे धकेला

आयुष घोटाला जांच के नाम पर मिटा दिए सबूत
आयुष घोटाला जांच के नाम पर मिटा दिए सबूत
सीएम योगी संज्ञान न लेते तो दब जाता खेल

इस खेल का खुलासा होकर मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक न पहुंचता तो अभी भी सबकुछ वैसे ही चलता रहता। जानकारों का कहना है कि विभागीय जांच के नाम पर चीजें रफा-दफा कर दी जातीं।

आयुष कॉलेजों में दाखिले के नाम पर मेधावी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया। नीट मेरिट में छेड़छाड़ कर मेधावियों को पीछे धकेल दिया गया। जबकि कम अंक पाने वालों को डॉक्टर बनने का मौका प्रदान किया गया। बुधवार को नीट मेरिट में शामिल छात्र आयुर्वेद निदेशालय पहुंचे।

नीट न देने वाले 22 में से नौ छात्रों ने लिया प्रवेश

जांच में नया खुलासा हुआ है। बिना नीट 22 में से नौ छात्रों ने प्रदेश के विभिन्न आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में दाखिला ले लिया। जबकि अभी तक विभाग के पास बिना नीट दाखिला पाने वालों की सूची नहीं थी।

बोर्ड में थे 13 सदस्य लेकिन कार्रवाई सिर्फ चार पर हुई

आयुष काउंसलिंग को पाक साफ बनाए रखने को शासन से विभाग तक के 13 अफसरों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लाखों का बजट आवंटित किया था। इसके बावजूद धंधेबाजों ने काउंसलिंग में खेल कर दिया।

घोटाले के समय नहीं था आयुष मंत्री सैनी

सहारनपुर। एडमिशन घोटाले को लेकर चर्चा में आए पूर्व आयुष मंत्री डॉ. धर्मसिंह सैनी ने कहा, घोटाले के समय वे आयुष मंत्री नहीं थे। काउंसलिंग मार्च में हुई थी जबकि उन्होंने 3 जनवरी को इस्तीफा दिया।

लखनऊ, विशेष संवाददाता। आयुष विभाग के तहत आने वाले आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी कॉलेजों में एडमिशन घोटाला करने वालों ने सबूत मिटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच शुरू होने के बाद नोडल एजेंसी द्वारा सुबूत खत्म करने के लिए डाटा के साथ छेड़छाड़ की गई। ऐसा इस खेल में शामिल अधिकारियों की शह पर किया गया। खास बात यह है कि सालों से चल रहे इस खेल को लेकर शासन के अधिकारी आंखें बंद किए रहे। अब सीबीआई की जांच में ऐसे सभी मामलों का खुलासा होगा।

निदेशालय के अफसरों ने यदि कुछ छात्रों द्वारा की गई फर्जी एडमिशन की शिकायतों का संज्ञान लिया होता तो आयुष विभाग का यह घोटाला शायद इतना बड़ा नहीं होता। मगर शिकायत की जांच की जगह पूरे मामले को दबा दिया गया। नतीजा यह हुआ कि बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस में सैकड़ों फर्जी प्रवेश दे दिए गए। अब तक एडमिशन के 891 मामले संदिग्ध पाए गए हैं। केंद्रीय आयुष परिषद ने जब अभ्यर्थियों की शिकायत पर राज्य सरकार को जांच के लिए लिखा, तब जांच शुरू हो सकी। उसके बाद गड़बड़ी को उजागर करने से ज्यादा जोर मामले को दबाने और सुबूत नष्ट करने पर रहा। आरोप है कि काउंसलिंग कराने का ठेका लेने वाली नोडल एजेंसी ने काफी डाटा डिलीट भी कर दिया है। सूत्रों की मानें तो विभागीय मंत्री ने भी इसे लेकर खासी नाराजगी जताई थी। उसके बाद से एजेंसी से जुड़े सभी लोग फरार हो गए।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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