आयुष घोटाला सख्ती के बाद निजी कॉलेजों ने भी शुरू की कार्रवाई
फर्जीवाड़े से दाखिला पाने वाले 885 छात्र निलंबित”

“आयुष घोटाला सख्ती के बाद निजी कॉलेजों ने भी शुरू की कार्रवाई
फर्जीवाड़े से दाखिला पाने वाले 885 छात्र निलंबित”

फर्जीवाड़े से दाखिला पाने वाले 885 छात्र निलंबित
फर्जीवाड़े से दाखिला पाने वाले 885 छात्र निलंबित
फर्जीवाड़े से दाखिला पाने वाले 885 छात्र निलंबित
आयुष कॉलेजों के दाखिले में लंबे समय से हो रहा खेल
लखनऊ। आयुष कॉलेजों में दाखिले का खेल नया नहीं है। इससे पहले भी नियमों के खिलाफ दाखिल हुए। अफसरों को निलंबित भी किया है। फिर भी फर्जीवाड़ा हो रहा है।

ब्योरा

पूर्व मंत्री सहित कई की भूमिका जांची जाएगी
लखनऊ, विशेष संवाददाता। आयुष विभाग में एडमिशन घोटाले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपे जाने के बाद हड़कंप की स्थिति है। सीबीआई अब तमाम पहलुओं से पर्दा उठाएगी।

ब्योरा

यूजी में कहां कितने हुए फर्जी दाखिले
संस्था स्वीकृत सीट भरी सीट फर्जी दाखिला

राजकीय आयुर्वेद कॉलेज 502 502 43

राजकीय होम्योपैथी कॉलेज 828 828 06

राजकीय यूनानी कॉलेज 128 128 04

प्राइवेट आयुर्वेद कॉलेज 5010 4615 473

प्राइवेट होम्योपैथिक कॉलेज 200 118 02

प्राइवेट यूनानी कॉलेज 670 606 363

06

छात्रों को पहले ही किया जा चुका है निलंबित

लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। आयुष अफसरों के बाद आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथ कॉलेजों में फर्जी प्रवेश पाने वाले छात्रों पर गाज गिरी है। प्रदेश के सरकारी व प्राइवेट आयुष कॉलेजों में 885 छात्रों को निलंबित कर दिया गया है। इससे पूर्व लखनऊ स्थित टूड़ियागंज राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के छह छात्रों को निलंबित किया जा चुका है।

यूपी के सरकारी व प्राइवेट आयुष कॉलेजों में बीएएमएस, बीयूएमएस और बीएचएमएस की 7338 सीटें स्वीकृत हैं। शैक्षिक सत्र 2021 में 6797 भरीं थीं। इनमें नीट-यूजी मेरिट से इतर 891 छात्रों को फर्जीवाड़ा कर दाखिला दिला दिया गया। आरोप हैं कि तीन से पांच लाख रुपये में एक-एक सीट भरी। 22 ऐसे छात्र हैं, जो नीट परीक्षा में शामिल ही नहीं हुए थे। 927 ऐसे छात्रों को विभिन्न महाविद्यालयों में काउंसलिंग के माध्यम से सीट का आवंटन किया गया है। जिसमें से 891 छात्रों ने दाखिला लिया। बाकी छात्र प्रवेश लेने नहीं पहुंचे।

ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी एडमिशन में घपलेबाजी उजागर होने के बाद शासन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू की। सबसे पहले राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के छह छात्रों को निलंबित किया गया। इसके बाद आयुर्वेद निदेशक डॉ. एसएन सिंह और काउंसलिंग में अहम भूमिका अदा करने वाले डॉ. उमाकांत यादव को निलंबित किया गया। दो अन्य अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश हुए हैं।

निदेशालय को भेजी सूचना निदेशालय के आदेश के बाद फर्जीवाड़ा कर दाखिला पाने वाले सभी छात्रों को निलंबित कर दिया गया है। 885 छात्रों को निलंबित करने के आदेश जारी किए गए हैं। इसमें सरकारी आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथिक कॉलेजों के 53 छात्र शामिल हैं। सरकारी कॉलेजों ने इसकी सूचना निदेशालय को भी भेज दी है। निजी कॉलेज के 832 छात्र को भी निलंबित कर दिया गया है। निजी कॉलेजों की सूचना निदेशालय को प्राप्त नहीं हुई।

पहली बार हुई कार्रवाई यूपी में पहली बार इतनी बड़ी तादाद में छात्रों को निलंबित किया गया है। इससे सभी शैक्षिक संस्थानों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों ने कहा कि सीबीआई गुजरे पांच वर्षों में हुए दाखिलों की जांच कर सकती है।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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