उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियां तो महत्वपूर्ण व उत्तर प्रदेश में पुलिस का अपराध मुक्त कार्रवाई लेकिन पुलिस स्टेशन में नहीं सुनी जाती आम पीड़ित एवं फरियादियों की फरियाद।

सभी अपराधिक प्रवृत्ति के पुलिसकर्मियों की थाने वार सूची बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य राज्य सरकारों को पूरे प्रमाण के साथ भेजा जाएगा।”
{थाने के सामने लिखा हुआ दलालों का प्रवेश वर्जित है का मिशन पूरी तरह से ध्वस्त}
नई दिल्ली। भारतीय मीडिया फाउंडेशन नई दिल्ली कार्यालय से जारी बयान में भारतीय मीडिया फाउंडेशन के संस्थापक एवं मैनेजमेंट अफेयर्स कमेटी के केंद्रीय अध्यक्ष एके बिंदुसार ने उत्तर प्रदेश में प्रदेश सरकार के नीतियों को सही बताते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश की पुलिस की सक्रियता इधर अपराध मुक्त प्रदेश बनाने में लगी हुई है नामी गिरामी अपराधियों की धरपकड़ की जा रही है।
लेकिन सबसे बड़े दुख का कारण है कि पुलिस स्टेशनों में पीड़ितों एवं फरियादियों की आवाज नहीं सुनी जा रही है।
थाने के सामने लिखा हुआ दलालों का प्रवेश वर्जित है का मिशन पूरी तरह से ध्वस्त है।
आम नागरिक से लेकर पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ताओं को थाने का रिपोर्ट लेने एवं फरियाद लेकर जाने पर उनके साथ अभद्र भाषाओं का प्रयोग किया जाता है और वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर से लेकर गैंगस्टर तक के लोगों को थाने में बैठने के लिए कुर्सियां दी जाती हैं। इस तरह का कार्य करने के लिए विशेष कुछ गिने-चुने पुलिस को किसने अधिकार दे दिया हैं, इस तरह का मामला प्रकाश में आया है। ऐसे मामले के लिए एक स्पेशल टीम गठित करके उत्तर प्रदेश सरकार जांच कराएं तो मामला खुलकर सामने आ जाएगा और उत्तर प्रदेश सरकार का मिशन पूर्ण होने में देर नहीं लगेगा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के पद पर युग चेतना पुरुष, योगी पुरुष, सभी धर्म और जातियों के प्रति स्नेह और प्यार बरसाने वाले सबके मान सम्मान करने की बात करने वाले योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री है। उनके शासन में अपराधी गुंडा माफिया अत्याचारी व्यभिचारी और आतंकवादी सर उठा करके तो नहीं चल पाएंगे यह भरोसा है परंतु सबसे जटिल समस्या प्रदेश की आम जनता की है, पीड़ितों की है, फरियादियों की है। जिनकी बात थाने में नहीं सुनी जाती। थाने में पहुंचते ही उनको इस तरफ से ट्रीट किया जाता है कि बेचारा पीड़ित समझ लेता है कि उसके साथ न्याय नहीं होने वाला है। वर्दी के भेष में थानों में पुलिस रक्षक नहीं बल्की भक्षकों की प्रवृत्ति रखने वाले लोगों की भरमार हो गई हैं। पुलिस के सामने ही पत्रकारों को भद्दी भद्दी गालियां दी जाती हैं, समाजिक कार्यकर्ताओं को अपमानित किया जाता हैं, पीड़ितों को मां बहन की भद्दी भद्दी गालियां विपक्षी द्वारा देते नजर आते हैं। पुलिस मूकदर्शक बन कर देखती रहती है जिसमें बदलाव लाने की आवश्यकता है।
इस पर जिले के आला प्रशासनिक अधिकारियों को भी ध्यान देना होगा। उनके आदेशों का अवहेलना प्रतिदिन हर थाने में होते रहते हैं। उस पर प्रशासनिक अधिकारी द्वारा एक्शन न लिए जाने के कारण थानेदार से लेकर वहां मौजूद सिपाही अपने कप्तान के आदेश को भी तवज्जो नहीं देता, उन्हें कुछ भी नहीं समझते हैं।
उन्होंने कहा कि सिर्फ उत्तर प्रदेश नहीं बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, दिल्ली जैसे राज्यों में भी इस तरह की घटनाएं उत्तर प्रदेश से भी खतरनाक देखने को मिलती हैं।
उन्होंने कहा कि उन सभी अपराधिक प्रवृत्ति के पुलिसकर्मियों की थाने वार सूची बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार एवं अन्य राज्य सरकारों को पूरे प्रमाण के साथ भेजा जाएगा।