
@,जब वायदों के पुल टूटते हैं तो पब्लिक ही डूबती है—
ये शहर पानी पानी हैं या हम–
एटा-ईसन नदी के आस पास ZH कॉलेज के पीछे रह रहे लोग दहशत में हैं पानी ने इस तरह तबाही मचा रखी है कि लोग घरों में भी सुरक्षित नहीं है हम क्या लिखेंगे यह तबाही लोगों के बीच में आप खुद देख सकते हैं लेकिन इतनी दिक्कतों के बाद भी प्रशासन का सर्मनाक कृत्य सुरक्षा के नाम पर सून्य है यही हाल शहर का हो रहा सीवर के नाम पर पब्लिक को खुलेआम सड़को पर मौत का सामना करना पड़ रहा है जरा सी नजर हटी तो सीधे मौत के मुंह मे—जो मकान पुराने बने हुये है उनमें पानी भर गया मुद्दतो से कालोनियों की सड़के ही नहीं बनी जहां टु्ट गई वहीं पेबंद लगा दिया अब तो सब समान हो रहा है क्या हाईवे क्या—कुल मिलाकर पब्लिक अब शासन, प्रशासन, की कार्यप्रणाली से कराहने लगी है और क्यों नहीं कराहे जब बायदों के पुल टूटते हैं तो पब्लिक ही डूबती है हर चीज की एक समय सीमा होती है वह टूट रही।
लेखिका, पत्रकार, दीप्ति चौहान।