पड़ताल : बेरोजगारी और अकेलेपन से देश में आत्महत्या दर 6.2% बढ़ी, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं

भारत में बेरोजगारी, अकेलापन, हिंसा, पारिवारिक समस्याएं, शराब की लत और आर्थिक समस्याओं के चलते आत्महत्या के मामले बढ़े हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 22 हजार 207 लोगों ने आत्महत्या की। तमिलनाडु में 18 हजार 925 मामले और मध्यप्रदेश में आत्महत्या के 14 हजार 965 मामले सामने आए हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल में 13 हजार 500 और कर्नाटक में 13 हजार 503 लोगों ने खुदखुशी की। महाराष्ट्र में आत्महत्या के मामले 2020 की तुलना में 13.5% बढ़े हैं। वहीं तमिलनाडु में 11.5%, मध्यप्रदेश में 9.1% मामले, पश्चिम बंगाल में 8.2 फीसदी और कर्नाटक में आत्महत्या के मामले 8% बढ़े हैं।
इन पांच राज्यों में हुई आत्महत्याएं देश में सामने आए मामलों का 50.4% है। जबकि बाकी 49.6% मामले अन्य 23 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज किए गए। देश की आबादी में सबसे अधिक हिस्सेदारी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में देश में होने वाली आत्महत्याओं के 3.6% मामले दर्ज किए गए।
देश की राजधानी दिल्ली और सबसे ज्यादा आबादी वाले केंद्र शासित प्रदेश से 2021 में आत्महत्या के 2,840 केस सामने आए। वहीं, देश के 53 बड़े शहरों में कुल 25,891 आत्महत्याएं हुईं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।
उल्लेखनीय है कि साल 2021 में आत्महत्या के 1 लाख 64 हजार 33 मामले सामने आए। जबकि 2020 में देश में 1 लाख 53 हजार 52 लोगों ने आत्महत्या की थी। 2021 से तुलना करें तो यह 7.2% वृद्धि है। वहीं, आत्महत्या की दर में 6.2% की वृद्धि हुई है।देश में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं महाराष्ट्र में दर्ज की गईं। इसके बाद तमिलनाडु और मध्यप्रदेश में आत्महत्या के सबसे ज्यादा मामले सामने आए।
बता दें कि महाराष्ट्र सरकार ने आत्महत्या करने वालों में बड़ी संख्या किसानों की है। इन किसानों की आत्महत्या की वजह जानने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने नई पहल शुरू की है। अब सरकारी अधिकारी महीने में तीन दिन किसानों के साथ खेतों में समय बिताएंगे, जिससे वो समझ सकें कि किसान किन परिस्थितियों में आत्महत्या करते हैं। यह पहल सितंबर से शुरू होगी, जो तीन महीने तक चलेगी।