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तलाकशुदा बहन के भरण पोषण पर भाई द्वारा किया गया खर्च भी पत्नी को भरण-पोषण की राशि तय करते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए- जानिए हाईकोर्ट का निर्णय
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????हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि भारत में, एक भाई अपनी तलाकशुदा बहन को नहीं छोड़ता है और पत्नी को दिए जाने वाले भरण-पोषण का निर्णय करते समय बहन पर भाई के खर्च को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
????कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के खिलाफ पत्नी की अपील पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें पति से उसे 6000 रुपये प्रति माह देने के लिए कहा गया था।
????अदालत ने यह भी कहा कि पत्नी ने इस संबंध में कुछ भी प्रस्तुत नहीं किया है कि पति का 79 वर्षीय पिता उस पर निर्भर था या नहीं।
????पत्नी के इस तर्क पर कि एक तलाकशुदा बहन पति पर निर्भर नहीं है, अदालत ने कहा कि भले ही बहन अपने पति से भरण-पोषण पाने की हकदार है, भारतीय समाज में भाई भी बहन का भरण-पोषण करता है और उसका परित्याग नहीं करता है।
????अदालत ने इस तथ्य को भी ध्यान में रखा कि पति ने पुनर्विवाह किया है और विवाह से एक बच्चा भी है।
????इसलिए, अदालत ने कहा कि एक संतुलन बनाने की जरूरत है और यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि अन्य लोग भी पति पर निर्भर हैं।
✴️मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने गुजारा भत्ता बढ़ाकर रु. 7500 कर दिया।
शीर्षक: सरिता बख्शी बनाम राज्य और अन्रो
मामला संख्या सीआरएल पुनरीक्षण याचिका संख्या 792/2018