विरासत वृक्षों की सूची में शामिल हो चुके हैं लखनऊ के ये दुर्लभ पेड़, जानिए इनकी दिलचस्प कहानी

“Lucknow News: विरासत वृक्षों की सूची में शामिल हो चुके हैं लखनऊ के ये दुर्लभ पेड़, जानिए इनकी दिलचस्प कहानी
~इस लेख में हम लखनऊ के उन पेड़ों की बात कर रहे है जो सदियों से जीते आ रहे हैं। वे पेड़ जिन्‍होंने आजादी की जंग को भी देखा है। लखनऊ में एनबीआरआइ काकाेरी मलिहाबाद कुकरैल व जू के कई ऐसे पेड़ हैं जो आजादी के जंग की गवाह हैं।”~

लखनऊ [अजय श्रीवास्‍तव]। ‘मैं 1857 में हुई आजादी की जंग का गवाह हूं। आज भी लोगों को छाया देने का काम रहा हूं। आजादी के दौरान हमारे पेड़ की डालों पर ही चढ़कर वीरागंना ऊदा देवी ने अंग्रेजी सैनिकों को मार गिराया था। साथ ही जीत हासिल की थी।

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एनबीआरआइ परिसर में लगा बरगद का पेड़ : मैं ही दशहरी आम का पूर्वज हूं। हमारे पेड़ से ही यह फल आया था, जिससे मलिहाबाद की दशहरी दुनिया में मशहूर है। दो सौ वर्ष से अधिक की आयु होने के कारण ही मुझे माता का भी दर्जा मिला है।

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दशहरी का पेड़ दशहरी गांव काकोरी : यह कहानी है, उन पेड़ों की, जो लंबे समय से हमारे पूर्वजों को आक्सीजन दे रहे थे और हम सब भी उनका आक्सीजन ले रहे हैं। यही कारण है कि पेड़ों से हमारे गहरे रिश्ते हैं। अगर इस रिश्ते को देखा जाए तो कई पेड़ हमारे परदादा जैसे ही हैं। कोई दो सौ वर्ष पुराना तो कोई सौ की उम्र पार करने के बाद भी उसी तरह से छाया दे रहा है, जैसे घरों में बुजुर्ग देते हैं। बुजुर्ग पेड़ों की याद इसलिए दिलाई जा रही है, क्योंकि पांच जून को पर्यावरण दिवस है तो पौधे लगाकर इस दिन को यादगार भी बनाया जा सकता है।

यही पौधे आगे चलकर पर्यावरण के प्रहरी भी होंगे और एक समय बाद इतिहास के पन्ने में दर्ज हो जाएंगे। हम बात करते हैं ऐसे ही कुछ पेड़ों की जो अब विरासत का हिस्सा बन चुके हैं। सौ वर्ष से पुराने ये पेड़ सरकारी अभिलेख में दिख रहे हैं। हर पेड़ की अलग-अलग कहानी है। किसी पेड़ के सहारे अंग्रेजी हुकूमत को ललकारा गया था तो किसी ने धार्मिक आधार पर अपनी पहचान बना ली थी।

अंग्रेजी हुकूमत से जंग का गवाह बने बरगद के पेड़ से जुड़ी जानकारी मिलेगी तो चिडिय़ाघर के पारिजात के तीन पेड़ बताएंगे कि वह चिडिय़ाघर बनने से पहले ही यहां की पहचान थे। राज्य जैव विविधता बोर्ड ने इन पेड़ों को विरासत वाले पेड़ों की सूची में रखा है और उसकी अपनी एक काफी टेबल बुक भी। है। 29 प्रजातियों के 993 विरासत वाले पेड़ों को उत्तर प्रदेश में खोजा गया था, जिसमें से 27 पेड़ लखनऊ के ही हैं।

अंग्रेजों पर यहीं से साधा गया था निशाना : वर्ष 1789 में अवध के नवाब सआदत अली खान ने गोमती के किनारे जिस राजकीय उद्यान को विकसित किया था, उसका बरगद का पेड़ आजादी की लड़ाई का गवाह बन गया। राणा प्रताप मार्ग पर राष्ट्रीय वानस्पतिक अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआइ) परिसर में लगे बरगद के पेड़ से भी अंग्रेजों पर गोलियां बरसाई गई थी।

नवंबर 1857 को अंग्रेजों से मोर्चा लेने के दौरान वीरांगना ऊदा देवी ने इसी पेड़ पर चढ़कर मोर्चा संभाला था और कई को मौत के घाट उतारा था। बरगद के इस विशालकाय पेड़ को राज्य जैव विविधता बोर्ड ने विरासत का दर्जा दिया है। एक समय वीरांगना ऊदा देवी स्मारक और एनबीआरआइ गार्डन एक ही होता था, लेकिन 1901 में अंग्रेजी शासक ने माल ढुलाई के लिए बीच से सड़क बना दी थी, जिसे हम अशोक मार्ग कहते हैं।

लखनऊ विश्वविद्यालय के कैलाश छात्रावास के गेट पर लगे बरगद के पेड़ की भी अपनी कहानी है। वर्ष 1927 में सर ज्वाला प्रसाद श्रीवास्तव ने छात्रावास बनाने के लिए जमीन दी थी, तब भी यह पेड़ ऊंचाइयों को छू रहा था। करीब 105 वर्ष पुराने पेड़ की यह भी पहचान है कि उसके नीचे मुहम्मद सैय्यद की मजार है। हर वर्ष जून की सात तारीख को उर्स का आयोजन होता है। मजार पर चादर और मिठाई चढ़ाई जाती है और कव्वाली होती है। प्रत्येक गुरुवार को बरगदी अमावस्या व अन्य अवसरों पर पेड़ की पूजा की की जाती है। इस हिसाब से सांप्रदायिक सौहार्द का भी प्रतीक हैं ये पेड़।

हमारे बुजुर्ग पेड़

कुकरैल रेंज में आम का पेड़- उम्र 150
बख्शी का तालाब के तिवारीपुर रेंज पीपल का पेड़- उम्र 100 वर्ष। धार्मिक मान्यता के चलते यहां के निवासी इस पेड़ की सुरक्षा भी करते हैं।
नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान में पारिजात के तीन पेड़ हैं। इसमें दो की उम्र 125-125 है तो एक 130 वर्ष का है। इसमें से एक पेड़ से खास तरह का फल निकलता है। इस फल में अंदर बीज होता है, जिसके ऊपर सफेद रंग की परत होती है। इसे विलायती इमली कहते हैं। इसका स्वाद खट्टा होता है।
जू में ही अरू का पेड़- उम्र 105 वर्ष
बैकुंठधाम खन्ना भट्टा सरोजनीनगर में पीपल का पेड़- उम्र 100 वर्ष
मलिहाबाद रेंज में मंझी निकरोजपुर में बरगद का पेड़- उम्र 100 वर्ष
गेहनाकला रेंज कुकरैल में आम का पेड़- उम्र 150
चौधरी पुरवा रेंज कुकरैल में पीपल का पेड़- उम्र 100 वर्ष
शिवानी विहार कुकरैल में पीपल का पेड़- 100 वर्ष
कल्याणपुर कामाख्या रेंज कुकरैल में बरगद का पेड़- उम्र 100 वर्ष
रसूलपुर सादत रेंज कुकरैल में पीपल पेड़- उम्र 100 वर्ष
जगपाल खेड़ा रेंज कुकरैल में लगा नीम का पेड़- उम्र 100 वर्ष
बेहटा बाजार बेहटा रेंज कुकरैल, बरगद- उम्र 100 वर्ष
विज्ञानपुरी भरवारा में पीपल के दो पेड़- दोनों की उम्र 150 वर्ष
सिकंदरपुर खुर्द, आम- उम्र 150 वर्ष
अजनाहर रेंज कुकरैल, बरगद उम्र 100 वर्ष
रजौली रेंज, बरगद- उम्र 100 वर्ष
बरघुरदासपुर कुकरैल रेंज, पीपल- उम्र 100 वर्ष
लखनऊ विश्वविद्यालय के पुराने कैंपस में पाकड़ का पेड़- उम्र 104 वर्ष
रेजीडेंसी परिसर में बरगद- उम्र 102 वर्ष

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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