
12 बार की जात में आया साढ़े तीन लाख रुपये से अधिक चढ़ावा
एटा: जलेसर में जब से बड़े मियां दरगाह कमेटी भंग कर प्रशासन ने नियंत्रण अपने हाथ में लिया है। तब से चढ़ावे की रकम का पूरा हिसाब किताब रखा जा रहा है। अब तक छह बार बुधवार और छह बार ही शनिवार की जात के चढ़ावे की गिनती हो चुकी है। उधर, शनिवार को पूरे उत्साह के साथ कड़ी सुरक्षा के बीच शनीचरी जात हुई। दूरदराज से तमाम श्रद्धालु बड़े मियां की दरगाह पर पहुंचे। दरगाह के बाहर स्थापित शनिदेव की भी पूजा अर्चना की गई।
आठ अप्रैल को बड़े मियां दरगाह कमेटी का मामला सामने आया था और प्रशासन ने रिसीवर नियुक्त कर कमेटी को भंग कर दिया था। तभी से राजस्व कर्मचारी जात वाले दिन यानी कि बुधवार और शनिवार को दरगाह पर मौजूद रहते हैं। उन्हीं की देखरेख में दानपात्र में पैसा एकत्रित रहता है। बाद में यह दानपात्र खोला जाता है और पैसे की गिनती होती है। यह पैसा बैंक में जमा किया जाता है, जबकि प्रशासन के नियंत्रण से पहले ऐसा नहीं था। दरगाह कमेटी के लोग कोई हिसाब किताब नहीं रखते थे। चढ़ावे की रकम आपस में बांट ली जाती थी। जात के दौरान जो लोग फड़ लगाकर बैठते थे, उनसे भी दरगाह कमेटी के पदाधिकारी वसूली करते थे। श्रद्धालुओं से बदसलूकी कर उन्हें पैसा चढ़ाने के लिए मजबूर किया जाता था। इन्हीं शिकायतों की जांच के दौरान दरगाह कमेटी दोषी पाई गई, तब प्रशासन ने वहां रिसीवर नियुक्त किया। अब तक छह-छह बार बुधवार और शनिवार की जात वाले दिन आए चढ़ावे की गिनती की जा चुकी है, इसमें 3,67,900 रुपये दानपात्र से निकले। चार बार हुई जात का पैसा अभी गिना जाना है। दरगाह कमेटी पर चढ़ावे की 99 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है, जिसकी एफआइआर भी दर्ज है। दरगाह कमेटी के खिलाफ सरकारी जमीन पर कब्जा कर उसे बेचने का मुकदमा भी दर्ज है। व्यवस्थाओं पर हो रहा खर्च