
रोडवेज के दागी परिचालकों को फिर मिले पुराने रूट
एटा: रोडवेज में जहां पिछले साल राजस्व चोरी के चलते शासन से हुई एआरएम तथा सहायक यातायात निरीक्षकों पर कार्रवाई के बाद कई दागी परिचालकों को उनके चहेते रूटों से हटा दिया गया।
विधानसभा चुनाव के बाद से फिर दागी अधिकारियों से साठगांठ कर अपने मनमाने रूटों पर लौट राजस्व चोरी को बढ़ावा दे रहे हैं। कई तरह की अनियमितताएं बढ़ रही है, लेकिन जिम्मेदार आंख बंद किए हैं। कुछ दागी कंडक्टर के लिए बसों के नए रूट भी बना दिए गए हैं।
राजस्व चोरी के मामले में एटा डिपो निदेशालय पर सुर्खियां बटोरता रहा है। पूर्व में कई रोडवेज अधिकारी राजस्व चोरी के चलते निलंबित वहीं स्थानांतरण जैसी गाज गिरवा चुके हैं। पिछले साल भी रोडवेज के अधिकारियों तथा निरीक्षक दल पर कार्रवाई के बाद नियुक्त हुए नए अधिकारियों ने राजस्व चोरी के मामले में दागी परिचालकों को चिहित कराते हुए उनके रूट बदलकर महकमे में सुधार का संकेत दिया। एटा से दिल्ली, अलीगंज, फर्रुखाबाद, शिकोहाबाद कई रूटों से दागी परिचालकों को हटाकर दूसरे रूटों पर भेज दिया गया। कई तो ऐसे थे रूट बदलने के कारण ड्यूटी छोड़ गए। पिछले छह महीनों से दागी फिर से अपने चहेते रूटों पर बस संचालन के लिए नियुक्त किए जा रहे हैं और सिलसिला जारी है। सबसे अधिक चर्चित अलीगंज-फर्रुखाबाद मार्ग पर हटाए गए सभी दागी परिचालक से मनमाने तरीके से संचालन कर रहे हैं। मई के पहले पखवाड़े में अलीगढ़ मार्ग पर एक ही परिचालक दो बार राजस्व चोरी में पकड़ा गया, लेकिन उसे हटाने के बजाय अभी तक उसी रूट पर ड्यूटी कराई जा रही है। उधर अलीगंज मार्ग के दागी परिचालक के लिए स्पेशल आगरा-फर्रुखाबाद बस सेवा शुरू कर दी गई। दागियों को फिर से पुराने रूटों पर भेजने के पीछे जिम्मेदारों की मनसा राजस्व वृद्धि की है या फिर राजस्व चोरी का पुराना खेल शुरू कराने की। डग्गेमारी बंद होने के मध्य मनमाने रूटों पर फिर से बस संचालन के लिए बसों की बोलियां लग रही हैं। क्षेत्रीय प्रबंधक रोडवेज मुहम्मद परवेज खान का इस संबंध में कहना है कि मामले की पड़ताल कराई जाएगी कि किस आधार पर दागी परिचालकों के रूट बदले गए हैं। इसीलिए नहीं समय सारणी
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-रोडवेज अधिकारियों से साठगांठ कर चहेते रूटों पर चल रहे पर परिचालकों के लिए बस संचालन की समय सारणी नहीं है। स्वार्थ पूर्ति के तहत उन्हें सिर्फ संचालन करना है। उनकी बस में किस समय चलेंगे यह खुद परिचालक ही तय करते हैं। यही वजह है कि विभिन्न मार्गों पर यात्रियों के लिए बसों का टोटा बना रहता है। यह बसें निरीक्षक दलों की लोकेशन लेने के बाद ही दौड़ती हैं।