मेरा भारत बदल रहा है कैसे समझते है…!!

मेरे देश के लोग बहुत भोले है.. लेकिन दूर देश से आये लोगों के लिए. भारत के लोग इतने भावुक है कि इन्हे सिखाया गया है कि अतिथि देवो भव… और यहीं सबसे बड़ा मन्त्र भी है कि भारत एक चरागाह बनता जा रहा है। दुनिया के जिस किसी कोने में पनाह नहीं मिले लेकिन भारत आकर रह बस सकते है।
अभी हाल में एक सर्वे हुआ कि पिछले बर्ष से पूर्व बर्मा से कुछ लाख रोहिंग्या मुस्लिम लोगों नें भारत में शरण ली थी। उन रोहिंग्याओ के घर एक बर्ष में 60000 / जी हाँ सही सुना 60 हजार बच्चो नें जन्म लिया है।हम इन आंकड़ों में यह नहीं बता रहें है कि बच्चे क्यों पैदा किए है। हम भारत के लोगों से यह सवाल कर रहें है कि आपके सन्साधनों पर विदेशी डाका डाल रहें है और आप चुप मुस्करा रहें है क्यों कि आपकी राजनैतिक पार्टियों अलग अलग है।
भारत एक लोकतान्त्रिक देश है यह भारत का संबिधान कहता है। लेकिन भारत जैसे कितने संबिधानो को इन विदेशीयों नें फाड़ कर अपनी लोहे कि कितावो को लागु किया है।भारत में बैठे IAS IPS भी इन गंभीर मुद्दों पर चुप बैठे है क्योंकि वो भी ऊपर के आदेश की मानते है। तमाम मामलो में भारत अपने अस्तित्व से लड़ रहा है लेकिन भारत का संबिधान एक दिन आएगा जब फाड़ दिया जायेगा और लोहा जारी कर दिया जायेगा… हम ये बात यूँही नहीं कर रहें है इसके कई देश प्रमाण है जहाँ बहुत कुछ सरकारों के अनुसार होता था लेकिन फिर लोहे के अनुसार होने लगा था।
भारत एक बहुधार्मिये व बहुजातीय देश है। लेकिन प्रान्त व्यवस्था नें पूरे देश को खंड-खंड कर रखा है जो कि परोक्ष रूप से दिखाई नहीं देता है परंतु देश की आतंरिक व्यवस्था से खंड-खंड ही है।
केंद्र सरकार एक बिल लाने जा रही है जो भारत के लिए अमृत साबित हों सकता है लेकिन जमीन पर उतरने में समय लग सकता है कॉमन सिविल कोड…। यह क़ानून भारत की तस्वीर और तकदीर बदल कर रख देगा। इस कोड को लाने में केंद्रीय समिति नें पूरा जोर लगाना शुरू कर दिया है। किन्तु धरातल पर सही दिशा में लागु हों सके इसके लिए देश के IAS और IPS की भूमिका अहम् होने जा रही है और यहीं कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार देश के सिविल सेवा में कार्यरत अधिकारियों से सम्बाद कर रहें है। वही इस क़ानून के लागु होने के बाद देश में मुक़ददमो की बाढ़ आनी शुरू होंगी। क्योंकि NRC अपनी सीढ़ी पर खड़ी है और भारत के कुछ चंद लोग संबिधान की दुहाई देनें वाले नाराज हों सकते है।लेकिन गृह मंत्री अमित शाह नें बंगाल में साफ शब्दों में कहा था कि NRC लागु होकर रहेगी।
अब यह समझना भी जरुरी है कि NRC और कॉमन सिविल कोड क्यों…. इन कानूनों के आने के पीछे भी भारत में रह कर वगावत करने वाले और अपनें खुद के कानूनों से चलाने वाले राज्यों में नकेल कसने के लिए आ रहा है। हम अभी आप को बता ही चुके है कि भारत एक गणराज्य देश है ऐसे में हर राज्य के अपने क़ानून और सीमाएं है। जिससे राज्य ना होकर सभी अपनी खुदी में देश घोषित होना चाहते है। और यहीं कारण है कि सिविल कोड और NRC आना कितना जरुरी हों चूका है….
बस देश में बैठे IAS IPS व ज्यूडसरी को अपने बच्चों के लिए देश के संसाधनों को बचाने के लिए जान फूँकनी होंगी।