अयोध्या में राम मंदिर के साथ विराट रामायण मंदिर भी होगा भव्यता का पर्याय, जीवंत होगा त्रेतायुग

अयोध्या में राम मंदिर के साथ विराट रामायण मंदिर भी होगा भव्यता का पर्याय, जीवंत होगा त्रेतायुग
Ayodhya Ram Mandir चार-छह माह में अयोध्या आते रहने वाले आचार्य कुणाल गत दिनों रामनगरी में थे और इसी दौरान उन्होंने रामायण मंदिर की विशिष्टताएं साझा कीं। उन्होंने बताया कि मंदिर का ब्लू प्रिंट तैयार है। बाउंड्रीवाल से लेकर सहायक प्रखंड निर्मित हो रहा है।”
अयोध्या, [रघुवरशरण]
रामजन्मभूमि पर निर्माणाधीन राममंदिर के साथ रामायण मंदिर भी भव्यता का पर्याय होगा। राममंदिर जहां 360 फीट लंबा, 235 फीट चौड़ा एवं 161 फीट ऊंचा है, वहीं रामायण मंदिर 1080 फीट लंबा, 540 फीट चौड़ा एवं 270 फीट ऊंचा है। विराट रामायण मंदिर का निर्माण बिहार प्रांत के चंपारण जिला में केसरिया नामक स्थान पर दो सौ एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित है। इस मंदिर का निर्माण भले बिहार में हो रहा हो, किंतु इसका राम मंदिर से गहरा जुड़ाव है।

रामायण मंदिर का जहां निर्माण हो रहा है, वह स्थान अयोध्या-जनकपुर मार्ग पर है और मान्यता के अनुसार जनकपुर से वापसी की बेला में राम बरात इस स्थल पर दो दिन तक ठहरी थी। इस मंदिर के सूत्रधार आचार्य किशोर कुणाल हैं। पूर्व आइपीएस अधिकारी किशोर कुणाल शासकीय सेवा के ही समय से राम मंदिर का मामला सुलझाने के लिए अयोध्या प्रकोष्ठ के विशेष कार्याधिकारी रह चुके हैं। दो दशक पूर्व गुजरात के सहायक पुलिस महानिदेशक रहते शासकीय सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कुणाल की दूसरी पारी राममंदिर और राम काज के प्रति समर्पित रही है।

पटना के महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव की भूमिका में उन्होंने किसी मंदिर को गौरव-गरिमा प्रदान करने का कीर्तिमान गढ़ते हुए महावीर कैंसर संस्थान के रूप में सेवा-संवेदना के भी क्षितिज पर विशिष्ट पहचान बनाई। शासकीय सेवा के दौरान रामजन्मभूमि से सरोकार की विरासत आगे बढ़ाते हुए आचार्य कुणाल ने न केवल अयोध्या विवाद पर केंद्रित प्रतिनिधि-प्रामाणिक पुस्तक लिखी, बल्कि सुप्रीम कोर्ट में स्वयं पक्षकार के रूप में प्रस्तुत हुए। कोर्ट ने उनकी पुस्तक के विवरण को संज्ञान में भी लिया।

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उन्होंने रामजन्मभूमि परिसर से ही लगे अमावा राममंदिर को नया कलेवर भी प्रदान किया और रामलला के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद से उनकी ओर से रामलला के दो से तीन हजार दर्शनार्थियों को नित्य निश्शुल्क भोजन भी कराया जाता है। उन्होंने रामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के लिए प्रति वर्ष दो करोड़ के हिसाब से पांच वर्षों में 10 करोड़ रुपये भी समर्पित करने की घोषणा कर रखी है। इस समर्पण की दो किस्तें उनकी ओर से रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेंट भी की जा चुकी हैं।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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