एक ब्राह्मण जिसने सिर्फ़ ३२ वर्ष की आयु मे बिना हथियार के सिर्फ़ ज्ञान के द्वारा भारत मे पूरी तरह फ़ैल चुके बौद्ध सम्प्रदाय को समूल मिटा कर रख दिया

हिन्दू धर्म, जिसका एक नाम सनातन धर्म भी हँ अर्थात जिसका कभी अंत नहीं होता इतिहास में भी हम देखते हँ की जब जब काल के प्रभाव से ये धर्म लडखडाता हँ तभी कोई न कोई संत महात्मा अवतार लेकर इस धर्म को उबार लेता हँ और आने वाले समय के लिए भी मजबूती प्रदान कर देता हँ बौद्ध आये और गए , मुग़ल आये और गए , पुर्तगाली आये और गए , अंग्रेज आये और गए , लेकिन अगर कोई नहीं गया तो वो ये हिन्दू धर्म ही हँ , ये धर्म आज भी वही हँ ,बाकी सभी विचारधाराए इस कभी न अंत होने वाले धर्म में समा गयी और यही इस धर्म की महानता हँ!
शंकराचार्य , भारत के एक महान संत , हिन्दू धर्म के महानायक और आदि जगद्गुरु , शंकराचार्य , एक नाम जो आगे चलकर उपाधि ही बन गया कदाचित अगर शंकराचार्य ने जन्म नहीं लिया होता तो यह भारत भूमि काफी पहले ही इस्लामी मुल्क में तब्दील हो गयी होती , क्योकि अहिंसावादी और खोखले बौद्धों में इतनी ताकत न होती जो बर्बर मुस्लिम आक्रांताओ का सामना कर पाते लेकिन इस प्रसंग में एक विद्वान् को भी याद करना जरुरी हँ
शंकराचार्य 16 बरस की उम्र से हिन्दू धर्म के मूल स्वरुप को पुनः प्रकट करने हेतु वैदिक साहित्य पर अपना लेखन कार्य समाप्त कर चुके थे और अपनी गुरु परंपरा के समाख अपना शरीर छोड़कर सदा के लिए ब्रह्मा में लीं होकर ब्रह्मानंद का भोग करना चाहते थे लेकिन गुरु परंपरा के आदेश पर सारे भारत में हिन्दू धर्म की पुनर्स्थापना के इस विशाल और दुष्कर कार्य को उन्होंने स्वीकार किया और अपनी ३२ वर्ष की आयु तक उन्होंने भारत से बौद्ध दर्शन का पूरी तरह विध्वंश कर दिया था
ब्राह्मण देवतओं यदि आदिगुरु शंकराचार्य भारत से बौद्ध सम्प्रदाय का सफ़ाया नहीं करते तो आज भारत मे रहने वाले सभी भय देने वाले आदेशो को सुनकर ( सुन्नी ) या इन आदेशो को सुनकर सियार की तरह चालाकी या शर्तो के साथ ( सिया ) मुसलमान बन गये होते
अरे ब्राह्मण द्रोहियोम ब्राह्मणो ने तुमपर कितने उपकार किये तब भी तुम्हारी गलतियों को बार-बार भोलकर तुम्हारा ही भला करते रहते हैं