
करोड़ों खर्च से मेडिकल कॉलेज बना, पर पेयजल की व्यवस्था नहीं
एटा – करोड़ों रुपये खर्च करके मेडिकल कॉलेज तो बना दिया गया। मगर यहां मरीजों और तीमारदारों के लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नही है। मरीज या तो पानी को खरीदकर लाए अथवा बाहर जाकर हैंडपंप की तलाश कर पानी भरें। तीसरे मंजिल पर भर्ती मरीजों के परिजनों को पानी के लिए इधर से उधर भटकना पढ़ता है। ऐसा नहीं है कि वहां पर आरओ नहीं है। दो-दो आरओ होने के बाद भी बंद पड़े है। भीषड गर्मी में बिना पानी के मरीज परेशान रहते है।
गुरुवार की दोपहर को मेडिकल कॉलेज में पीने के पानी की समस्या को देखा। रोजाना मेडिकल कॉलेज में करीब 1500 से अधिक पर्चे बनते है। यह रोजाना आने वाले मरीजों की संख्या है। इनके साथ कुछ तीमारदार भी आते है। पानी की कोई व्यवस्था ना होने के कारण लोग अपने-अपने हाथों में पानी की बोलते थामें रहते है। इसमें चाहे सुरक्षा गार्ड हो अथवा डाक्टर। हर किसी के साथ में पानी की बोलत ही दिखाई देती है। जब पुराना जिला अस्तपाल था तो एक पीने के पानी के लिए आरओ प्लांट लगा हुआ है। यह प्लांट खराब है। जो पानी की टंकी है उसका ढक्कन ही गायब है। उसके ऊपर ईंट पत्थर रख दिए गए है। यहां पानी की कोई उपलब्धता नहीं है। इसके बाद हमने महिला अस्तपाल की ओर से लगे आरओ प्लांट का हाल देखा। वहां पर भी आरओ प्लांट बंद था। पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी। किनारे से एक टंकी लगी थी उसमें कौन सा पानी आ रहा था यह पता नहीं, लेकिन मरीज के साथ आए तीमारदार भी यह देखकर परेशान थे कि पीने का पानी कहां पर मिलेगा।
वार्डों में भी पीने के पानी की व्यवस्था नहीं
महिला अस्तपाल में बनी हुई विंग में अलग-अलग बार्ड बने हुए है। तीन मंजिल तक इसमें मरीज भर्ती रहते है। इस विंग के किसी भी फ्लोर पर पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्रथम तल पर प्रसव पीड़ित महिलाएं भर्ती रहती है। दूसरे तल पर ओपीडी चलती है। तीसरे और चाथे तल पर मरीज भर्ती रहते है। ऐसे में एक बोतल भी पानी लेना है तो इन लोगों को अस्तपाल के बाहर जाना पड़ता है।
यहां पर मैं सुबह से दिखाने के लिए आया हूं। जब मुझे प्यास लगी तो मैं इधर-उधर काफी देर से देख रहा हूं कि कहीं पानी पीने के लिए मिल जाए। कहीं पर भी कोई पानी नहीं दिखाई दिया। कोई ऐसा हैंडपंप भी नहीं मिला जिस पर मैं पानी पी लूं।
मनोज चौहान, मरीज
इतना बड़ा मेडिकल कॉलेज बनाया जा रहा है। यहां पर पानी का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। पानी के लिए इधर से उधर भटकना पढ़ता है। पानी ना होने से काफी परेशानी होती है। इस भीषड़ गर्मी में पल-पल पर पानी की जरुरत पढ़ती है। अधिकारियों को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
रिपुसूधन, तीमारदार
करीब दस माह पहले सदर विधायक जी ने आरओ प्लांट के लिए पैसा दिया था। यह पैसा अभी नहीं मिल सका है। कई बार सीडीओ साहाब को पत्र भी लिखा है। फोन पर वार्ता भी हुई है। इसे सही कराने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
डा. अशोक कुमार, सीएमएम महिला अस्तपाल