
सक्रिय क्षयरोगी खोज अभियान में अलीगंज में मिले 347 रोगी
एटा – राष्ट्रीय क्षयरोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में 9 से 22 मार्च तक सक्रिय क्षयरोगी खोज अभियान चला गया। अभियान में सर्वाधिक क्षयरोगी अलीगंज तहसील क्षेत्र में 347 मिले हैं। जबकि अभियान में 415 क्षयरोगी तलाशे गए। जिनका तत्काल उपचार शुरू कराया गया है।
जिला क्षयरोग अधिकारी डा. राजेश शर्मा ने बताया कि अभियान में हुई स्क्रीनिंग में 1589 लोगों के लक्षणों के आधार पर चिन्हित अिकया गया। जिसमें से 77 बलगम जांच, क्लीनिकल जांच में 338 क्षयरोगी पाये गए हैं। उसमें अलीगंज तहसील क्षेत्र में हुई स्क्रीनिंग में 517 लोग लक्षणों के आधार पर चिन्हित किये गए। जिसमें से 31 की बलगम जांच करायी गई। जबकि 236 की एक्सरे और चिकित्सकीय परीक्षण में क्षयरोगी पाए गए। जांच में ब्लॉक अलीगंज में 267, ब्लॉक जैथरा में 80 क्षयरोगी पाये गए है। इसके अलावा सीएचसी शीतलपुर में 35, निधौलीकलां में 15, अवागढ़ में 10 और अवागढ़ क्षेत्र में 8 क्षयरोगी पाए गए है। डीटीओ ने बताया कि अभियान में मिले क्षयरोगियों का पोर्टल पर पंजीकरण कर तत्काल उपचार शुरू कराया गया है। साथ ही उनको पोषण भत्ता 500 रुपये दिलाने की भी शुरूआत की गई है। सक्रिय क्षयरोग अभियान में डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम कॉर्डिनेटर दिलीप शर्मा, पीपीएम कॉर्डिनेटर आशीष पाराशरी, डीपीटीसी अरविंद सिंह चौहान, डीईओ जितेन्द्र कुमार, लेखाकार पूनम यादव शामिल रही।
पांच वर्ष से चार से पांच हजार निकल रहे क्षयरोगी
जिले में प्रतिवर्ष क्षयरोगियों की संख्या 4 से 5 हजार के बीच रह रही है। जबकि निरंतर क्षयरोग की रोकथाम के लिए प्रयास किए जा रहे है। पीपीएम कॉर्डीनेटर आशीष पाराशरी ने बताया कि वर्ष 2017 में 3137 क्षयरोगी मिले थे। वर्ष 2018 में 4798 को उपचार दिया गया। वर्ष 2019 में 5357 क्षयरोगी निकले। वर्ष 2020 में 3758 क्षयरोगी मिले। वर्ष 2021 में 4688 क्षयरोगी तलाशे गए। जबकि वर्ष 2022 में अब तक सक्रिय क्षयरोगियों की संख्या बढ़कर 1915 हो गई है।
वर्ष 2025 तक देश को क्षयरोग मुक्त बनाने की मुहिम
जिला क्षयरोग अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को 2025 तक क्षयरोग मुक्त बनाने को मुहिम चलायी जा रही है। मुहिम के तहत राष्ट्रीय क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गतिविधियां संचालित की जा रही है। सक्रिय क्षयरोगी खोज अभियान भी इसी कार्यक्रम की गतिविधि है। जिसमें क्षयरोगियों को चिन्हित कर उपचार देने का कार्य किया जा रहा है।