
जनस्वास्थ्य के आगे नहीं आने दी धर्म की दीवार
एटा। कोरोना की मार देश और दुनिया के लोगों ने झेली है। इस बीमारी ने किसी के धर्म को देखकर प्रहार नहीं किया था, जो भी इसकी जद में आया उसे निगल गई। जब देश में कोरोना का टीका लगा तो तमाम लोगों ने भ्रांतियां फैलाईं और लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया, लेकिन धर्मगुरुओं ने जनस्वास्थ्य के आगे धर्म की दीवार नहीं आने दी। एक ओर जहां लोगों को टीकाकरण के लिए जागरूक किया, तो धर्मस्थलों में बिना टीकाकरण प्रवेश प्रतिबंधित करने से भी बहुत असर पड़ा।
टीकाकरण से ही कोरोना को मात दी जा सकती है, यह एक सच्चाई है जो कई लोगों को देर से समझ आई। जब आई तो जिले के 12 लाख से अधिक लोगों ने टीका लगवाकर खुद को सुरक्षित कर लिया है। इसमें दो लाख के करीब अल्पसंख्यक समाज के लोग भी हैं। अब 12 से 14 आयु वर्ष और 15 से 17 वर्ष के किशोर-किशोरियों के टीकाकरण पर जोर दिया जा रहा है। दोनों ही आयु वर्ग के बालक और किशोरों का टीकाकरण जनवरी व मार्च 2022 में शुरू हुआ है।
बात जब जनस्वास्थ्य की हो तो धर्म को बीच में लाना गलत है। बीमारी किसी भी धर्म और समुदाय के बीच हो सकती है। इसलिए कोरोना का टीका लगवाना बहुत जरूरी है। कोरोना टीकाकरण की शुरूआत में कुछ गलत अफवाहें फैलाई गईं थीं। जिसे लेकर लोगों को तरह-तरह से जागरूक किया। – हाफिज तौकीर रजा, मारहरा
कोरोना पर सफलता पाने के लिए सरकार द्वारा टीकाकरण कराया जा रहा है। जिन लोगों के घरों में किसी को कोरोना हो गया था, उनको दर्द आज भी महसूस होता है। कोरोना से बचने के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है। इसके लिए सभी धर्म और समाज के लोगों को आगे आने की अपील करते हैं। – महंत तारा गिरि, मारहरा