
Agra. …जिसकी लाठी उसकी भैंस ये कहावत पूर्व विधायक के परिजनों पर फिट बैठ रही है। दिवगंत विधायक द्वारा चार साल पहले फर्जी तरीके से जमीन खरीदी उसपर उनके पुत्रों ने शाम, दाम, दंड के आधार पर कब्जा कर गेट चढ़ा दिया। उनका कहना है कि जमीन उनकी है उनके पिता के नाम रजस्ट्री है। जबकि टोडरमल द्वारा बनाये खसरा-खतौनी में जमीन आजादी से पहले से कब्रिस्तान व मरघट की दर्ज चली आ रही है। कानून के जानकार कहते हैं कि नजूल, राजकीय अस्थान, मरघट व कब्रिस्तान की जगह बेची या खरीदी नहीं जा सकती। इसमे विधायक के नाम वर्ष 2018 में रजस्ट्री हुई। लेखपाल, व अन्य अधिकारियों की शह पर हुआ है। विधायक अगर सही थे तो जिंदा रहते जमीन पर कब्जा क्यों नहीं किया। मामले की जांच निष्पक्ष होकर जमीन सही लोगों के सपुर्द होनी चाहिए। इसमे और भी लोग दोषी हैं। जनसंदेश तथ्यों के आधार पर उनको बेनकाब करेगा।