उत्तर प्रदेश की राजनीति को समझ लीजिये
अब करहल से हारे हुए जीतेंगे….
स्वामी प्रसाद मौर्य को भीख में दी जा रहीं करहल सीट..

फजिलनगर से बुरी तरह हारने वाले व समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव को सब्जबाग़ दिखाने वाले करहल से विधानसभा पहुँचेगे…
ऐसा हम नहीं.. यह शिवपाल यादव का कहना है कि पार्टी में सभी का सम्मान रहना चाहिए.. लेकिन जिस नेता का सम्मान जनता नें हराकर किया हों उसे कैसा सम्मान ”भैया अखिलेश,,
प्रदेश की करहल सीट से सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव चुनाव जीते थे। अब इस सीट को छोड़ रहें है और इस सीट से बीजेपी को लात मार कर जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य को अखिलेश यादव नें करहल की सीट भीख में दी है…
यें सब यूँही नहीं हों रहा है… प्रदेश में मौर्य समाज की कुछ इज्जत बचीकुची है उसे भी किनारे लगाने की तैयारी हों रहीं है। जिसे स्वामी प्रसाद मौर्य ही लगाएंगे। अगर जीत कर आये तो प्रदेश की विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी सपा की तरफ से बनाने की रणनीति पर काम किया जा सकता है…
शिवपाल चाचा को अखिलेश यादव की तरफ से ऐसा कुछ भी देने का मन नहीं है जिससे कि शिवपाल पुनः प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हों सकें।
अखिलेश यादव का मानना है कि लोकसभा 2024 की राजनीती में कैसे बीजेपी के बक्कल उतारें जाए… इस पर काम करने का पूरा ध्यान लगाया जायेगा…
इधर बीजेपी में उन नेताओं के भी बक्कल उतारनें शुरू कर दिये है जिन्होंने 2017 के बाद बीजेपी को पसीने-पसीने किए थे..।
मौर्य समाज का किस मण्डल में कितना वोट बीजेपी को पड़ा है और कितना सपा को मिला है। इस पर भी स्क्रीनिग कमेटी गठित की जाएगी। 2024 लोकसभा चुनाव में तय की जाएगी कि मौर्य समाज को प्रदेश कि सक्रिय राजनीति में रखा जाए या नहीं
मौर्य समाज के बाद बीजेपी की नजर पटेल समाज पर भी टेड़ी है। क्यूंकि जिस तरह से विधानसभा 2022 के चुनाव में अधिक सीट मांगी गई थीं।क्या फिर लोकसभा चुनाव में अनुप्रिया पटेल एक बार फिर सीटे बढ़ा कर ना मांगे
बीजेपी दो अन्य समाज पर अपनी रिपोर्ट बना रहीं है। जिसमें जाट समाज प्रमुख है। पच्छिम क्षेत्र में जयंत चौधरी के बराबर किस नेता को खड़ा किया जाए। यह बड़ी समस्या अभी भी बनी हुई है। क्यूंकि कैद्रीय मंत्री संजीब बाल्यान जाट लेंड में फिट नहीं बैठ पा रहें है।
दूसरा समाज लोधी समाज है जो कि प्रदेश कि करीब 40 सीटों को जीतनें और हराने कि कुब्बत रखता है। जिस लोधी वोट पर दिवंगत पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह की अच्छी पकड़ थीं।लोधी वोट को भी अपने ही फाले में रखने के लिए बीजेपी नें अपनी गोटे बिछनी शुरू कर दी है। क्यूंकि इन 40 सीटों की वजह से ही कल्याण सिंह नें बीजेपी को करीब 14 बर्ष सत्ता से दूर रखा था।इसलिए कल्याण सिंह परिवार के साथ-साथ लोधी समाज के ही बड़े नेता एटा सदर से दो बार विधायक चुनें जाने वाले विपिन कुमार वर्मा डेविड पर भी अपनी नजरे अब सीधी रखनी शुरू कर दी है।इस बार मंत्री पदों की दौड़ में विपिन कुमार वर्मा डेविड का नाम भी दौड़ रहा है। जो कि राज्यमंत्री( स्वतंत्र प्रभार)बनाये जा सकते है ।
एक समाज से दो नेताओं पर लोकसभा तक पहुंचने के फार्मूले पर काम करने की तैयारी में बीजेपी जुटी