सिद्ध चक्र पूजा से कर्म कटते हैं-चैत्यसागर मुनिराज

एटा।जो व्यक्ति भाव पूर्वक सिद्धचक्र विधान करता है उसके पापों का नाश होकर वह आगे चलकर मोक्ष प्राप्त करता है जिस प्रकार राजा श्री पाल ने किया था।मेरे गुरु आचार्य श्री विमलसागर जी की जन्म भूमि पर पहली बार हो रहा विधान कोसमा वासियों के लिये विशिष्ट फल दाई होगा।उपरोक्त विचार प्रमुख जैन संत आचार्य चैत्यसागर जी ने कोसमा में चल रहे विधान में बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों को धर्म उपदेश देते समय कहे।सर्वप्रथम प्रातः जिन प्रतिमाओं का पंचामृत अभिषेक किया गया नित्य पूजा के बाद पंचमेरु,नंदीश्वर व सिद्ध की पूजा के बाद 64 अर्घ्यं द्वारा सिद्धों की पूजा पंडित श्री आनंद प्रकाश जी कोलकाता ने कराई जिसमें उन्होंने पूजा की सही विधि को भी समझाया
साथ ही डॉ सुशील जैन मैनपुरी ने सरल भाषा मे प्रवचन करते हुये बताया जो आत्मा को कसे उसे कषाय कहतेहैं,ये 4 होती हैं क्रोध,मान,माया,लोभ उन्होंने कहा क्रोध कहीं से आता नहीं हम खुद करते हैं,सो इसे रोकना भी हमें ही होगा।गाली मत दो,बुरे शब्द मत बोलो, हित मित प्रिय बोलो।पानी की बाल्टी बनो,गैस का सिलिंडर नहीं जो खुद भी जलता है दूसरों की भी जला देता है श्री साजन जैन की टीम ने सांस्कृतिक कार्यक्रम व स्वार्थ का संसार नाटक प्रस्तुत किया कार्यक्रम में उपस्थित आर.के जैन मुंबई, चिंतामणि जैन जयपुर,रविन्द्र बज जयपुर,शांतिलाल टोंग्या,राजेश काला,शरद जैन,जौली जैन,विवेक जैन,अमित जैन,विमल ऊषा मार्सन्स, अन्य भक्तगण औरंगाबाद,नागालैंड,अमेरिका,महाराष्ट्र से आए भक्तगण .