कांग्रेस के लिए आत्ममंथन का समय

पांच राज्यो के चुनाव परिणाम आज आये जिनमे चार राज्यो में भाजपा सरकार बनाने जा रही है , आम आदमी पार्टी एक राज्य में , इन चुनावों में सबसे ज्यादा बुरी गत ओर हार यदि किसी की हुई है तो वो कांग्रेस और मायावती की है , मायावती ने तो खैर लगता था कि हार मान ली है और चुनाव उस शिद्दत से नही लड़ा जितनी शिद्दत से वे लड़ सकती थी , कांग्रेस ने जरूर प्रियंका वाड्रा के नेतृत्व में काफी मेहनत की ओर खुद प्रियंका वाड्रा को मुख्यमंत्री की दावेदार पेश किया गया , परंतु उसके वावजूद कांग्रेस का मात्र 2 सीट पर सिमट जाना बताता है कि अब जनता में गांधी परिवार का कोई जादू बाकी नही बचा , मेने अपने ब्लॉग में कई बार कहा है और आज भी कह रहा हु की जब तक गांधी परिवार के हाथ मे कांग्रेस की बागडोर रहेगी कांग्रेस का यही हस्र होना निश्चित है , कांग्रेस अभी जिन थोड़े बहुत राज्यो में अपनी उपस्तिथि दर्ज करवा रही है वहाँ सिर्फ उसके लोकल नेताओ का व्यक्तित्व प्रभावी है जिसके कारण उसे जीत मिलती है , जैसे राजस्थान में गहलोत ओर सचिन पायलट , दोनों दिग्गज नेता है और जनता में अच्छी पकड़ ओर पहचान रखते है , कांग्रेस को आत्ममंथन जरूर करना चाहिए यदि आगे कोई भी राज्य या लोकसभा के चुनाव जीतने की आकांक्षा है तो यदि नही तो सब बढ़िया है , हमारे नेता सर्वशक्तिमान है मान कर चलते रहो , मंजिल आपकी तय है ,
पंजाब में केजरीवाल की जीत बताती है कि आप आने वाले समय मे कांग्रेस का एक विकल्प बन सकती है , केजरीवाल जरूर इससे अतिउत्साहित होंगे और हो सकता है की वे दिल्ली छोड़ कर पंजाब के मुख्यमन्त्री बन जाये, हालांकि वे ऐसा करेंगे नही क्योंकि इससे दिल्ली की जनता नाराज हो जाएगी और ऐसा केजरीवाल कभी नही चाहेंगे, हां वे प्रधानमंत्री बनने की महत्वकांक्षा जरूर पाल सकते है परन्तु उसमे अभी काफी लंबा समय है
योगी जी ओर मोदीजी का जादू निश्चित तौर पर मतदाताओं में देखने को मिला ,उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाताओं ओर महिलाओं ने भी भाजपा को गुपचुप वोट दिया है इसका सबसे बड़ा सबूत है देबबन्द से भाजपा उम्मीदवार की जीत , मुस्लिम समुदाय में भी जो लोग हिंसा का समर्थन नही करते वे योगी ओर मोदीजी को अंदरूनी समर्थन देते है , इस नतीजे का असर 2024 के लोकसभा चुनाव में जरूर होगा