आखिर कबाड़ियों पर प्रशासन मेहरबान क्यो, खबर चलने के बाद कबाड़ी संचालक ने रातोरात चोरी का माल क्यो गायब किया।

मैहर। इन दिनों क्षेत्र में चर्चा जोरों से चल रहा है कि केजेएस कॉलोनी के चोरी मामले में सुनारों पर ताबड़तोड़ जांच के बोझ से दबते ही स्वर्णकार संघ सुनारों के बचाव सामने आए लेकिन इन कबाड़ियों पर किसी भी तरह की कोई भी कार्यवाही न होना लोगो मे तरह तरह की चर्चा के साथ पुलिस पर ही मिली भगत के आरोपो की बात सामने आ रही है मिली जानकारी अनुसार कबाड़ की दुकान मतलब कबाड़ लेकिन बड़े लेबल के कबाड़ी कबाड़ में खरीदे हुए समान को वाहनों से निकलने वाले सामग्रियों को भी बेचने का काम करते है यानी सरकार को भी ये कबाड़ी टेक्स व जीएसटी को चुना लगाते है महीनों में ये कबाड़ी जो बहुत से ऐसे समान कबाड़ की आड़ में आते है जो बहुत से जरूरतमंदों को बाजार रेट से लगभग 10 रुपये कम रेट से बेचते है ,और सरकार को टैक्स का चूना लगाते,सवाल ये उठ रहा है कि कबाड़ियों के लाइसेंस किस चीज का होता है कबाड़ में लेकर फुटकर बेचने का या थोक बेचने का ? आखिर क्या कारण है कि इतनी बड़ी मात्रा में छोटी बड़ी गाड़ियों की कटिंग पर पुलिस व जिम्मेदार विभाग जांच व कार्यवाही में पीछे क्यो है, यही नही कबाड़ी के पास आखिर दर्जन भर घरेलू गैस टंकी कैसे या चोरी की तो नही क्योकि लोगो के घरों से चोरी होने वाले बहुत से सामग्रियों के पहचाने लायक कोई चीज नही होती, ऐसे में कबाड़ियों के कबाड़ में भारी मात्रा में घरेलू सरेंडर किसी अन्य ओर इशारा कर रहा है खैर आखिर किसका आशिर्बाद है इन अवैध कबाड़ कारोबारियों पर जिससे खुलेआम सोनवारी टोलवे के पास ये प्रशासन के नाक के नीचे गाड़ियों की कटिंग की जाती है और नियमो को ठेंगा दिखाता है, और जिम्मेदार विभाग मूक दर्शक बना हुआ है।
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार सोनवारी टोलवे के पास एक सबसे बड़ी कबाड़खाने की किला के मालिक ने खबर चलते ही रातोरात अवैध या चोरी की कबाड़ सब गायब कर दिया गया लेकिन दूसरे स्थान पर भारी मात्रा में कापर व पीतल के माल की भंडार को छुपा कर रखा गया है जहाँ किसी की नजर नही पड़े, सूत्रों से मिली जानकारी सैकड़ो वाहनों की कटिंग की गई मलवे को रातोंरात अउने पौने रेट पर बेचकर चोरी की माल को हटाया गया लेकिन स्थानीय प्रशासन के कुछ नुमाइंदे इसका सहयोग भी किये?
खैर अब अगर पुलिस जांच भी करती है तो अब उस कबाड़ के किला में कबाड़ ही हाथ लगेगा क्योकि की असली माल तो पार कर दिया गया। अगर समय रहते हुई होती तो शायद अवैध कबाड़ का गढ़ से बहुत से चोरी के माल की सुराग मिल जाते?