कौन है वो ‘शातिर’ जिसने 25 जिलों में सिस्टम को अपनी उँगलियों पर नचाया

*अनामिका शुक्ला प्रकरण: कौन है वो ‘शातिर’ जिसने 25 जिलों में सिस्टम को अपनी उँगलियों पर नचाया?*

अनामिका शुक्ला (Anamika Shukla) फर्जीवाड़े में अलग-अलग जिलों में अलग-अलग लोगों के जरिये ये संभव नहीं था. ऐसे में इसका कोई न कोई ‘रिंग मास्‍टर’ था.

लखनऊ. अनामिका शुक्ला (Anamika Shukla Case) ने 25 अलग-अलग जिलों में नौकरी जरूर की, लेकिन ऐसा करवाने वाला कोई एक ही ‘रिंग मास्टर’ होगा. शिक्षा विभाग (Education Department) के अफसरों में दबी जुबान में यही बात हो रही है कि आखिर कौन है वो ‘रिंग मास्टर’ जिसने 25 जिलों में एक जैसी सेटिंग कर डाली. अलग-अलग जिलों में अलग-अलग लोगों के जरिये ये संभव नहीं था. ऊपर से ये भी तो रिस्क रहता कि जितने ज्यादा लोग इन्वॉल्व होंगे, मामले के खुलने का उतना ही ज्यादा डर बना रहता और कमाई में भी कमीशन बंटता. कस्तूरबा गांधी विद्यालय में जो भर्ती प्रक्रिया है, उससे ये साफ हो जाता है कि हो न हो कोई एक ही व्यक्ति है जिसने सिस्टम को अपने काबू में करके एक साथ 25 जिलों में अनामिका शुक्ला के नाम पर दूसरी महिलाओं को नौकरी दिलवाई. ये रिंग मास्टर शिक्षा विभाग का भी हो सकता है और बाहर का भी. लेकिन, यदि बाहर का भी है तो शिक्षा विभाग का कोई तो है जिसने उस बाहरी को किसी कैंडिडेट की सारी गोपनीय जानकारी दी और डाक्यूमेंट्स मुहैया करवाये.

आइये समझते हैं कि इस फर्जीवाड़े को कैसे अंजाम दिया गया होगा. लेकिन इससे पहले टीचर्स की नियुक्ति प्रक्रिया को जानते हैं जिसको तोड़ा मरोड़ा गया. पूरे सूबे में 746 कस्तूरबा गांधी विद्यालय हैं. इनमें संविदा के आधार पर टीचर्स को तैनाती होती है. हर जिले के लिए अलग-अलग विज्ञापन निकाला जाता है. जिले की चयन समिति मेरिट के आधार पर नियुक्ति करती है.

अनामिका शुक्ला के मामले में क्या हुआ होगा?

किसी जिले में कस्तूरबा विद्यालय में शिक्षिका के खाली पद पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकला होगा. इसे असली वाली अनामिका शुक्ला ने भरा होगा. कुछ दिनों बाद दूसरे जिले में भर्ती के लिए भी असली अनामिका ने फॉर्म भरा होगा (गोंडा में असली अनामिका शुक्ला होने का दावा करने वाली महिला ने बताया है कि उन्होंने 5 जगहों से फॉर्म भरा था). इस भर्ती में किसी भी जिले का कैंडिडेट किसी भी जिले में अप्लाई कर सकता है. असली अनामिका ने कई जगह से फॉर्म भरे. इसके बाद बनाई गई मेरिट में उनका चयन हो गया. कॉउंसिलिंग में यदि अनामिका गयी होतीं तो किसी एक जगह नियुक्ति हो गयी होती. हाई मेरिट होने के कारण बाकी जिलों में भी उनका चयन हो गया. अनामिका ने तो चयन के बावजूद कहीं भी जॉइन नहीं किया. शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों या बाबुओं को ये बात मालूम थी कि अनामिका नाम की लड़की इतने जिलों में चयनित हो गयी है. अब अनामिका तो कहीं भी गयी नहीं और वहां की सीट खाली रह गयी. ऐसे में ‘रिंग मास्टर’ ने अनामिका की गोपनीय जानकारी और डॉक्यूमेंट हासिल किये और सभी जिलों में डमी कैंडिडेट भर्ती के लिए भेज दिए. सब कुछ असली अनामिका का लेकिन कैंडिडेट की फ़ोटो अलग-अलग. नौकरी कांट्रैक्‍चुअल है, इसलिए बहुत गहनता से छानबीन भी नहीं हुई होगी. ऐसे में बाकी जगहों पर भी लड़कियां अनामिका शुक्ल के नाम से नौकरी करने लगीं. बाद में जितने भी विद्यालयों में भर्ती निकली सभी जगह अनामिका के असली कागज़ात पर फ़र्ज़ी महिलाएं नौकरी पाती रहीं. तभी तो असली अनामिका ने 5 जगहों पर अप्लाई किया लेकिन 25 जगहों पर इस नाम से दूसरे लोग नौकरी करते पाए गये. यानी 20 स्कूलों में फ़र्ज़ी अनामिका ने फॉर्म भी भरा.

शिक्षा विभाग के अफसरों या बाबुओं की क्या रही होगी भूमिका?
भर्ती में आये किसी कैंडिडेट के दस्तावेज तो शिक्षा विभाग के अफसरों या बाबुओं के पास होते ही हैं. इस भर्ती से जुड़े ऐसे ही किसी बाबू या अधिकारी ने ‘रिंग मास्टर’ को अनामिका शुक्ला के दस्तावेज मुहैया कराए होंगे. इन्हीं दस्तावेज़ के आधार पर फ़र्ज़ी अनामिकाओं ने नौकरी पायी. अब एक-एक करके डमी अनामिका सामने आ रही हैं, लेकिन अभी बहुतों का सामने आना बाकी है. खासकर ‘रिंग मास्टर’ का और शिक्षा विभाग के उसके ‘चिंटू’ का.

दूसरी भर्ती में भी ऐसा ही हो चुका है फर्जीवाड़ा
किसी मेरिटोरियस कैंडिडेट के डाक्यूमेंट्स का आधार पर प्रदेश में न जाने कितने फ़र्ज़ी लोग नौकरी कर रहे हैं. अनामिका शुक्ला जैसा ही एक दूसरा मामला शिक्षा विभाग का ही है. लखनऊ के एक इंटर कॉलेज के लेक्चरर के नाम पर बाराबंकी के प्राथमिक विद्यालय में उसी नाम से दूसरा व्यक्ति मज़े से नौकरी कर रहा था. इस मामले में भी डाक्यूमेंट्स शिक्षा विभाग से ही लीक हुए और फ़र्ज़ी कैंडिडेट तक पहुंचे. इंटर कॉलेज के चयन होने से पहले असली व्यक्ति का चयन प्राइमरी के लिए हुआ था. उन्हीं के डाक्यूमेंट्स के आधार पर अन्य व्यक्ति ने उनके नाम पर प्राइमरी में नौकरी कर ली. भांडा तब फूटा जब पेंशन स्कीम के लिए पैन नंबर को जोड़ा जाने लगा. फ़र्ज़ी शिक्षक फरार है.
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