
कोल विधानसभा सीट पर मुद्दों के चक्रव्यूह में मतों का ध्रुवीकर – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – विधानसभा चुनावी रण में कोल विधानसभा सीट के लिए रोचक मुकाबला होगा। 21 साल बाद 2017 में इस सीट पर कमल खिला चुकी भाजपा इसकी ताजगी बरकरार रखना चाहती है। विपक्ष बदलाव लाने के लिए पूरी मशक्कत कर रहा है। जातीय गोलबंदी का नजारा फिर दिखने लगा है। मतदाता भी अब मुद्दों की बात कर रहा हैं। मिश्रित आबादी वाले क्षेत्र में हिंदू और मुसलमानों की सर्वाधिक आबादी है। सबके अपने-अपने मुद्दे हैं। देखना है कि मुद्दों के इस चक्रव्यूह में मतों का ध्रुवीकरण करने में उम्मीदवार कितने सफल हो पाते हैं।भाजपा ने यहां सात बार जीत दर्ज की। लेकिन, बदले राजनीतिक समीकरणों के चलते भाजपा को 21 साल वनवास झेलना पड़ा था। 2017 में कमल खिलने के बाद वनवास खत्म हुआ। यहां से अनिल पाराशर भाजपा विधायक बने। भाजपा अब इस सीट को गंवाना नहीं चाहती। 1962 से 2007 तक यह सीट आरक्षित रही थी। 2008 के परिसीमन में सामान्य घोषित हुई इस सीट पर 2012 में सपा प्रत्याशी जमीर उल्लाह चुनाव लड़े और कांग्रेस प्रत्याशी विवेक बंसल को करीब 600 मतों के अंतर से मात देकर विधायक बने। 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अनिल पाराशर सपा प्रत्याशी अज्जू इशाक को शिकस्त देकर विधायक बने। इस चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन होने के बावजूद कोल सीट पर सपा और कांग्रेस के उम्मीदवार मैदान में थे। माना गया कि गठबंधन के दोनों प्रत्याशियों के आमने-सामने आने का लाभ भाजपा को मिला था। इस बार भी कांग्रेस से विवेक बंसल, सपा से अज्जू इश्हाक और भाजपा से अनिल पाराशर मैदान में हैं। बसपा से मोहम्मद बिलाल पहली बार ताल ठोंक रहे हैं। अनिल पाराशर जहां अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्य गिना रहे हैं, वहीं विपक्ष स्थानीय मुद्दे और अधूरी योजनाएं गिनाकर अपना वोट बैंक बढ़ाने में लगा है। कोल विधानसभा क्षेत्र में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय समेत आधा शहर और शहर से सटे मथुरा और आगरा रोड के गांवों आते हैं, जहां सड़क, सफाई, बिजली, पानी बड़े मुद्दे हैं।रामघाट रोड, क्वार्सी चौराहे, दोदपुर आदि इलाकों में जाम, अतिक्रमण से आबादी प्रभावित है। उधर, एटा चुंगी बाईपास से सटे इलाकों में जलभराव की समस्या का समाधान नहीं हो सका। क्वार्सी से एटा चुंगी तक ओवरब्रिज, सड़क का चौड़ीकरण और नाले को भूमिगत किए जाने की योजनाओं पर काम नहीं हुआ।कोल विधानसभा में मुस्लिम करीब 1.45 लाख, ब्राह्मण 60 हजार, क्षत्रिय 50 हजार, वैश्य 35 हजार, जाटव 30 हजार, लोधी 20 हजार है।