एटा के स्वास्थ्यकर्मी, परलोक तक में लगा आते हैं वैक्सीन

एटा के स्वास्थ्यकर्मी, परलोक तक में लगा आते हैं वैक्सीन
ढ़ाई माह पूर्व मृत महिला को दूसरी डोज देने का आया मैसेज
शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन करवाने हेतु सीएमओ डलवा रहे हैं दवाब
-3 नवम्बर 21 को परलोक सिधारी मालती देवी नई बस्ती बारहवीघा को लगाई दूसरी डोज।
-बनगांव में पूर्ण वैक्सीनेशन के बाद फिर से प्रथम डोज लगाने का पहुंचा मैसेज।
-छुट्टी गई कर्मचारी की आईडी से हुआ फर्जी वैक्सीनेशन।

एटा (सम्वाददाता)। जनपद में स्वास्थ्य विभाग का एक नया कारनामा सामने आया है, आपको बता दें अनिल कुमार नामक एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी मां की मृत्यु 3 नवम्बर 2021 को हो चुकी है लेकिन दिनांक 10 जनवरी को दोपहर 2.30 बजे उसके पास मैसेज आया कि उनकी मां को कोविड वैक्सीन की दूसरी डोज भी लगा दी गई है।
आपको बता दें मृतक महिला मालती देवी पत्नी मनमोहन सिंह के पुत्र अनिल कुमार उर्फ बबलू ने बताया कि वह एटा के थाना कोतवाली नगर क्षेत्र के मौहल्ला नई बस्ती बारहवीघा का निवासी है उनकी मां को पिछले वर्ष मार्च में कोविड वैक्सीन की पहली डोज लगी थी। कुछ समय पश्चात उसकी मां किसी अन्य बीमारी से पीड़ित हो गई इसके बाद उनका दिल्ली के गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल में इलाज चला और विगत वर्ष 3 नवम्बर को उनका देहांत हो गया।
अनिल ने बताया कि कई दिन पूर्व दोपहर लगभग 2.30 बजे उसके मोबाइल पर मैसेज आया कि उनकी मां मालती देवी को कोविड की सभी डोज सफलतापूर्वक लगा दी गई हैं। मैसेज देखकर अनिल कुमार चैंक गया, उसका कहना है कि जब उसकी मां की मृत्यु ढाई माह पूर्व हो चुकी है तो आज उनको वैक्सीन कैसे लग गई।
ऐसा ही एक मामला बनगांव में देखने को मिला है जिसमें एक व्यक्ति का पूर्ण वैक्सीनेशन हो चुका है, परन्तु उसके पास फिर से प्रथम डोज लगाने का मैसेज पहुंच गया। जिससे वह आश्चर्य चकित हो गया और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों से उसने पूछताछ की तो कर्मचारियों ने उसे बताया कि भूल से आपका प्रथम डोज का रजिस्ट्रेशन हो गया होगा। इसलिए यह कोई चिंता का विषय नहीं है।
आश्चर्य तो इस बात का है कि इतना फर्जी वैक्सीनेशन दर्शाया जा रहा है तो आखिर वह वैक्सीन कहां जा रही है। वैक्सीन प्राइवेट डाक्टरों को बेची जा रही है अथवा नालियों में बहाई जा रही है। चर्चायें इस प्रकार की हैं कि शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन कराने के लिए एटा के सीएमओ जिलाधिकारी महोदय का नाम लेकर प्रभारी चिकित्साधिकारियों पर दवाब बना रहे हैं तथा प्रभारी चिकित्साधिकारी महिला बीएचडब्ल्यू जो वैक्सीनेशन का काम कर रही हैं उन पर दवाब बना रहे हैं। यदि वो फर्जी वैक्सीनेशन दर्शाने के लिए मना करती हैं तो उनको निलम्बित एवं बर्खास्त करने की धमकी दी जाती है। नौकरी बचाने के भय से कर्मचारियों को ऐसा घिनौना कृत्य करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार कुछ लोग यह कहते भी मिल जाते हैं कि उन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाई सिर्फ पैसे खर्च किये तो उनको सभी डोज कंप्लीट होने का प्रमाण पत्र मिल चुका है। मृतक महिला के वैक्सीनेशन होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान तो लगता ही है साथ ही अधिकारियों की कार्यप्रणाली की भी पोल खोलता है। इस सम्बंध में सीएमओ से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि ‘एक महिला के वैक्सीन लगने की जानकारी मिली है, जांच कर कार्यवाही की जायेगी।’
आश्चर्य तो इस बात का है कि एक ओर सीएमओ शत-प्रतिशत वैक्सीनेशन हेतु दवाब बना रहे हैं फिर फर्जीकरण की जांच कराने की बात भी कह रहे हैं। ऐसी जांच की सत्यता कैसे प्रमाणित होगी कि जांच कहीं खानापूर्ति के लिए ही तो नहीं की गई।
अतः जिलाधिकारी महोदय से अनुरोध है कि वह इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच किसी मजिस्टेªट द्वारा कराये तथा दोषी पाये जाने पर सम्बंधितों के विरूद्ध कठोरतम कार्यवाही करायें ताकि फर्जी वैक्सीनेशन रोका जा सके।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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