बंद कमरे में पास हुआ नगर निगम का 589 करोड़ का बजट – रिपोर्ट शुभम शर्मा

बंद कमरे में पास हुआ नगर निगम का 589 करोड़ का बजट – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – नगर निगम का करीब 589 करोड़ का पुनरीक्षित बजट बंद कमरे में पास हो गया। आनन-फानन में कार्यकारिणी बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया था। डेढ़ घंटे में बुधवार को बजट पर मुहर लगा दी गई। मीडिया को भी इस बैठक से दूर रखा गया। इस पर महापौर ने नाराजगी जताकर अधिकारियों से जवाब मांगने की बात कही है। कार्यकारिणी के सदस्यों (पार्षद) की सहमति पर पुनरीक्षित बजट पर मुहर लगती है। 13 दिसंबर को जवाहर भवन में कार्यकारिणी बैठक तय थी। लेकिन, पार्षदों के विरोध चलते स्थगित करनी पड़ी। बैठक में पार्षद नईम अख्तर, मुशर्रफ मजहर, रंजीत चौधरी व सद्दाम हुसैन ही पहुंचे थे। बाकी पार्षद महापौर कार्यालय के सामने पार्क में बैठे रहे। बजट पास करने के लिए कम से कम सात सदस्यों की सहमति चाहिए। कोरम पूरा न होने पर बैठक स्थगित कर दी गई। बैठक की अगली तारीख तय नहीं थी। मंगलवार रात 10 बजे महापौर ने बुधवार को कार्यकारिणी बैठक बुलाने का निर्णय लिया। शाम चार बजे जवाहर भवन में बैठक बुलाई गई। महापौर मोहम्मद फुरकान, नगर आयुक्त गौरांग राठी, अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार गुप्त, सीटीओ विनय राय के अलावा उपसभापति डा. मुकेश शर्मा, संजय शर्मा, विजय तोमर, राजेंद्र किशोर, सुरेंद्र पचौरी समेत कार्यकारिणी के सभी सदस्य बैठक मौजूद थे। कुछ देर चर्चा के बाद लेखाधिकारी अखिलेश चंद्र तिवारी ने 588 करोड़ 99 लाख 30 हजार 980 रुपये का पुनरीक्षित बजट पेश किया, जो बिना किसी आपत्ति के पास कर दिया गया। पार्षदों ने बैठक में जनहित के मुद्दे उठाए। इनमें साफ-सफाई, नालों की सफाई, पेयजल, पथ प्रकाश, नाली-खड़ंजा निर्माण, घरों से कूड़ा उठाना, सफाई कर्मचारियों की कमी, गड्ढामुक्त सड़कें, पार्षदों का यात्रा भत्ता, आवारा कुत्तों व बंदरों को पकड़ना, अलीगढ़ हैबिटेट सेंटर में पार्षद व महापौर कार्यालय का निर्माण, पार्षदों के लिए आवास आदि मुद्दों पर चर्चा हुई। पार्षदों के यात्रा भत्ता व पार्षद कल्याण फंड के विस्तार पर भी चर्चा हुई। पार्षद मुर्शरफ मजहर ने कहा कि पार्षदों को यात्रा भत्ता समय से नहीं मिल रहा था। इस पर निर्णय हुआ कि बोर्ड बैठक के बाद यात्रा भत्ता दे दिया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर पार्षद कल्याण फंड से पार्षदों को मदद दी जाएगी।
नगर निगम अफसरों की यह गलती है। उन्हें बैठक की सूचना मीडिया को देनी चाहिए। पहले भी सूचनाएं दी जाती रही है। इसके लिए अफसरों से लिखित में जवाब मांगा जाएगा।
मोहम्मद फुरकान, महापौर

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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