किसान नेता बिजली घर पर बैठे धरना देने, विभाग ने काट दी बिजली – रिपोर्ट शुभम शर्मा

किसान नेता बिजली घर पर बैठे धरना देने, विभाग ने काट दी बिजली – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – ठिठुरन भरी सर्दी में बिजली घर पर अनिश्चिकालीन धरना देने पहुंचे किसान नेताओं को यहां न बिजली मिली, न पेयजल की सुविधा। किसान नेताओं का कहना है कि रात होते ही विभाग से बिजली काट दी। अंधेरे में धरना जारी रहा। 1.85 करोड़ के बिल घोटाले में निर्णायक कार्रवाई होने तक धरना जारी रखने का किसान नेताओं ने ऐलान किया है। इनकी मांग है कि जो उपभोक्ता बिल दे चुके हैं, उनसे पुन: बिल न वसूला जाए। घोटाले में लिप्त अधिकारी, कर्मचारियों पर कार्रवाई हो। इनकी संपत्ति नीलाम कर घोटाले की धनराशि की भरपाई की जाए। संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक शशिकांत ने बताया कि 10 फरवरी को अकराबाद ब्लाक में 50 लाख के गबन का सबसे पहला मामला सामने आया था। किसान उपभोक्ताओं ने बिल जमा कराकर रसीदें प्राप्त कीं। कर्मचारियों से बिल का पैसा विभाग में जमा नहीं किया। जब घोटाले का पर्दाफाश हुआ, तब उपभोक्ताओं की रसीदें फर्जी ठहरा दी गईं। विभागीय अधिकारी जांच की बजाय उपभोक्ताओं को धमकाने लगे। । लेजर में जीरो बेलेंस में समायोजन कर दोबारा उनके खातों पर हजारों का बिल थोप दिया। अन्य ब्लाक में भी ऐसे ही मामले सामने आए थे। कुछ कर्मचारियों पर विभाग ने सरकारी धन के गबन में मुकदमा दर्ज कराया था। जिले में तकरीबन 800 उपभोक्ताओं के जमा बिल का गबन कर 1.85 करोड़ का बंदरबांट हुआ है। किसानों के कनेक्शन काटने की कार्रवई की जा रही है। किसान संगठनों के संज्ञान में मामला आते ही 20 सितंबर को अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र सारस्वत का घेराव किया गया। उसी दिन देरशाम तक जिलाधिकारी आवास पर धरना दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर बिजली अधिकारियों और किसान नेताओं की 21 सितंबर को बैठक हुई। अधीक्षण अभियंता के निर्देश पर अधिशासी अभियंता तृतीय पीके सागर को टीम के साथ जांच के लिए भेजा गया। विभागीय अधिकारी उपभोक्ताओं पर ही दोष मढ़ने लगे। तब किसान संगठन ने धरना-प्रदर्शन का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि 2016 में झांसी के मऊरानीपुर में हुए घोटाले में यहां के अधिकारी दोषी पाए गए थे। इस अधिकारी से 27.50 लाख रुपये की वसूली का आदेश हुए थे। इसी अधिकारी को जांच सौंपी गई है। इससे किसान संगठनों में नाराजगी और बढ़ गई। मंगलवार रात बिजली काट दी गई। धरना अंधेरे में भी जारी रहा।

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

यह खबर /लेख मेरे ( निशाकांत शर्मा ) द्वारा प्रकाशित किया गया है इस खबर के सम्बंधित किसी भी वाद - विवाद के लिए में खुद जिम्मेदार होंगा

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