
सर्द रातें काटने को सड़क पर मजबूर है बेसहारा बेघर लोग – रिपोर्ट शुभम शर्मा
अलीगढ़ – सर्द मौसम का मिजाज तल्ख होता जा रहा है। इससे बेघर-बेसहारा लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कुछ फुटपाथ पर सर्द रातें काटने को मजबूर हैं तो कुछ दुकानों और ठेलों की आड़ में फटे, पुराने कंबल आेढ़े सिकुड़े बैठे नजर आ जाते हैं। सोमवार रात भी ऐसा देखने को मिला। सर्द हवाएं कंपकंपी छुड़ा रही थीं। खुले आसमान के नीचे सोने वाले असहाय लोगों को नगर निगम अधिकारी शेल्टर होम नहीं पहुंचा पा रहे। निगम के शेल्टर होम खाली पड़े रहते हैं। अस्थाई शेल्टर होम की व्यवस्था अब तक नहीं हो सकी है। सुबह के वक्त हल्का कोहरा छाया हुआ था। आठ बजे सूर्य नारायण ने दर्शन दिए तो कोहरा छंट गया। लोगों ने गुनगुनी धूप का आनंद लिया। सुबह का अधिकतम तापमान 23 डिग्री और न्यूनतम तापमान छह डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दोपहर तक राहत रही, लेकिन दिन ढलते ही मौसम बदलने लगा। घर के अंदर भी कंपकंपी छूट रही थी। सड़कों पर लोग गर्म कपड़ों के अलावा सिर और कान ढकने के लिए मफलर और कैप लगाए नजर आए। वातावरण में हल्की धुंध छाने लगी थी। सर्द मौसम उन बेघर लोगों को प्रभावित करने लगा है, जो खुले में सोते हैं। गांधीपार्क, मालगोदाम, कठपुला, रेलवे स्टेशन रोड आदि स्थानों पर सड़क किनारे ये लोग ठिठुरते नजर आते हैं। इनके पास न ओढ़ने के लिए कंबल हैं, न ढंग से बिछाने को बिस्तर। ऐसे ही लोगों को आश्रय देने के लिए नगर निगम के तीन स्थाई रैन बसेरे बने हुए हैं। लेकिन, ठंड से बेहाल लाचारों को इन रैन बसेरों में नहीं पहुंचाया जा रहा। बेघर, बेसहारा लोगों को रैन बसेरों में आश्रय देने के शासन के निर्देश हैं। बावजूद इसके लिए नगर निगम कोई प्रयास करता नजर नहीं आ रहा। रैन बसेरे खाली रहते हैं। सोमवार रात गांधीपार्क स्थित शेल्टर होम में बिस्तर लगे हुए थे, लेकिन सोने वाला कोई नहीं था। गूलर रोड स्थित रैन बसेरे में सरीखे हालात थे। सार्वजनिक स्थलों पर अलाव जलाने की व्यवस्था भी नहीं हो सकी है। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए टेंडर किए जा रहे हैं।