_”फर्नीचर बनवा कर मजदूर की मजदूरी डकार गए थे एसआई व कोतवाल साहब”
क्रॉसर……
एएसपी की जांच में दोनों पुलिसकर्मी पाए गए दोषी”__
क्रॉसर……
“मिस्त्री ने जब मजदूरी मांगी तो उसे झूठे मुकदमे में फंसाने की दी थी धमकी!”

लखीमपुर-खीरी।आज से करीब तीन वर्ष पूर्व मैगलगंज कोतवाली में तैनात एक इंस्पेक्टर व एसआई ने मजदूरी करने वाले कारपेंटर से करीब तीन लाख का फर्नीचर बनवाया उसके बाद जब मिस्त्री ने अपनी मजदूरी मांगने की कोशिश की तो मात्र पचास हजार रुपए देकर उसे थाने से भगा दिया तब से पीड़ित लगातार उच्चाधिकारियों के दफ्तरों की गणेश परिक्रमा कर चक्कर काटता रहा। किसी ने सच ही कहा है कि सच्चाई छिप नहीं सकती बनावट के उसूलों से कि खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज के फूलों से। आखिरकार अपनी बातों पर अडिग रहे गरीब पेशा मजदूर कारपेंटर सुशील को काफी जद्दोजहद के बाद न्याय मिलते साफ दिख रहा है। बता दें कि अपनी तैनाती के दौरान बतौर थाना प्रभारी निरीक्षक मैगलगंज में मैगलगंज थाना परिसर के सरकारी आवास में तीन वर्ष पूर्व वहां तैनात इंस्पेक्टर घनश्याम राम व एसआई सुरेंद्र सिंह के खिलाफ चल रही विभागीय जांच आखिरकार पूरी हो ही गयी। जांच कर रहे एएसपी अरुण कुमार सिंह ने अपनी निष्पक्ष जांच में दोनों पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है। जानकारी के अनुसार कस्बे के बरगांवां रोड निवासी कारपेंटर सुशील विश्वकर्मा ने डीजीपी को दिए प्रार्थना पत्र में शिकायत की थी कि मैगलगंज कोतवाली में तैनात तत्कालीन इंस्पेक्टर घनश्याम राम व एसआई सुरेंद्र सिंह ने अपना घरेलू फर्नीचर उससे बनवाने हेतु तीन लाख रुपयों में ठेका दिया था। ठेके के मुताबिक सुशील कुमार ने सरकारी आवास में रंदा मशीन व अन्य उपयोगी मशीनों को लगाकर अपने अन्य मजदूर साथियों के साथ घरेलू व इमारती सामान कीमती सागौन की लकड़ी से तैयार किया था। इस दौरान कारपेंटर को महज 50 हजार रुपए दिया गया था। पीड़ित कारपेंटर का आरोप है कि शेष बकाया ढाई लाख रुपए मांगने पर दोनों अधिकारियों द्वारा उसका उत्पीड़न किया जा रहा था। फर्जी मुकदमों में फंसा देने की धमकी तक दी गई थी। पुलिस के खौफ से वह इस हद तक डर गया कि पलायन को मजबूर हो गया।किसी का साथ न मिलते देख मजबूरी में उसने राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री, मानवाधिकार को शिकायती प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई।जिसमें एएसपी ने मामले की जांच करने के बाद इस बात की पुष्टि की है कि दोनों पुलिस अधिकारियों द्वारा थाना परिसर के आवास में फर्नीचर बनवाया गया,जिसकी मजदूरी कारपेंटर को नहीं दी गई। मामले में दोनों पुलिस अधिकारी दोषी पाए गए हैं।

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पीड़ित कारपेंटर – 9621775837जब पुलिस ही अपराधी हो तो न्याय कहाँ से मिलेगा-सुशील
मैगलगंज-खीरी।किसी दौर में लगातार समाचार पत्रों की सुर्खियों में रहने वाले मामले में खबरों पर विराम भले ही लग गया हो लेकिन गरीब मजदूर के हाथ अभी कुछ नही लग पाया है।सुशील के अनुसार उसने सैकड़ो प्रार्थना पत्र देश प्रदेश के तमाम अधिकारियों को अभी तक देकर न्याय की मांग की लेकिन कोई नतीजा नही निकला।पूरा मामला मैगलगंज कोतवाली का है। लगभग दो वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक के द्वारा सरकारी आवास में भारी मात्रा में बनवाये गए घरेलू व इमारती फर्नीचर की मजदूरी के मामले में पीड़ित पक्ष अभी तक खाली हाथ है।पीड़ित के अनुसार उसने न्याय पाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया।जब पुलिस ही अपराधी हो तो न्याय कहाँ से मिलेगा।आपको बता दें वर्ष 2018 में मैगलगंज कोतवाली में तैनात प्रभारी निरीक्षक घनश्याम राम पर तस्करी की हुई लकड़ी से सरकारी आवास में घरेलू व इमारती फर्नीचर के निर्माण कस्बे के ही सुशील कुमार व इन्ही के अन्य साथी मिस्त्रीयों के द्वारा कराये जाने व काम के एवज में तय राशि के विपरीत कम मजदूरी दिए जाने का आरोप लगा था।पीड़ित पक्ष के अनुसार पुलिस अधिकारियों से 3 लाख रु.मजदूरी की बात हुई थी लेकिन काम हो जाने के बाद मात्र 50 हजार रु.ही मजदूरी दी गयी।बकाया रकम मांगने पर जानलेवा हमले व फर्जी मुकदमे में जेल भेज देने की धमकी मिलने पर उसने मकान आदि बेचकर साथी मिस्त्रियों का व किराये पर लाई गई मशीनों का भुगतान किया।पीड़ित पक्ष ने न्याय की आस में डी जी पी ,मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के पास गुहार लगाई। तब जाकर डी जी पी के निर्देश पर जांच में मामला सही पाए जाने पर उपरोक्त प्रभारी निरीक्षक व दरोगा को दोषी पाए जाते हुए सम्बंधित इंस्पेक्टर की चरित्र पंजिका पर परिनिन्दा लेख अंकित करने के आदेश संबंधित पुलिस कार्यालय को दिए गए हैं ।पीड़ित का कहना है कि केवल परिनिन्दा लेख से मुझे न्याय नही मिलता साहब मैंने तो अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है न्याय के खातिर।पीड़ित की मांग है कि संबंधित पुलिसकर्मियों पर मुकदमा पंजीकृत किया जाए व मेरी मजदूरी मय ब्याज मुझे दिलवाई जाए।अब देखना ये है कि प्रशासन मजदूर को न्याय दिलवाने में क्या कदम उठाता है।
जिले के जिम्मेदार पत्रकार साथियों का इस पर क्या विचार है क्या कारण है अभी तक क्यों न्याय नहीं मिला अपने विचार व्यक्त करें ऑनलाइन मेंबर ध्यान दें सुझाव प्रेषित करें
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