
!!.राजनीतिक छटपटाहट, उत्तर प्रदेश में शह और मात की जंग, साइकिल एवं कमल की सवारी कर बसपा सुप्रीमो मायावती को दिया तलाक: बसपा में अपने ही होंगे विरोधी, कई पुराने चेहरों ने दिया झटका.!!
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव धीरे धीरे नजदीक आता जा रहा है। चुनाव से पहले मजबूत ठौर की तलाश में नेता लगे हुए हैं। अगर देखा जाए तो अब तक सबसे अधिक झटका बसपा को लगा है। बसपा से अधिकतर पुराने चेहरे पार्टी छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं। दूसरे दलों में गए नेता हो या विधायक टिकट के वादे पर ही गए होंगे स्वाभाविक हैं। इसलिए यही नेता इस बार बसपा के लिए बड़ी चुनौती होंगे। चुनाव में बसपा उम्मीदवारों को उन्हीं अपनों का सामना करना होगा हो कभी अपने हुआ करते थे।
साइकिल की सवारी कर हाथी को छोड़ा
राम अचल राजभर अकबरपुर अंबेडकरनगर से वर्ष 2017 में पांचवीं बार विधायक बने। राम अचल और सुखदेव राजभर की बसपा में राजभर जाति की बड़े नेता के रूप में होती थी। सुखदेव राजभर का निधन हो गया और उनके पुत्र कमलाकांत सपाई हो गए हैं। कमलाकांत के अपने पिता की सीट दीदारगंज आजमगढ़ से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी है। इसी तरह राम अचल राजभर भी सपा के टिकट से अकबरपुर सीट से चुनाव मैदान में ताल ठोंकने की तैयारी कर रहे हैं। अब बात कुर्मी नेता लालजी वर्मा की करते हैं। लालजी वर्मा कटेहरी अकबरपुर से सत्रहवीं विधानसभा में पांचवीं बार विधायक चुने गए। इस बार वह भी सपा के टिकट से मैदान में होंगे। ये नेता कभी बसपा की पहचान हुआ करते थे। आज ये पार्टी में नहीं हैं।
बड़ी लकीर खींचने की होगी चुनौती
बसपा वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में अपने दम पर मैदान में उतरी थी। इस चुनाव में उसके कुल 19 उम्मीदवार जीतकर विधायक बने। मौजूदा समय बसपा के पास मात्र छह विधायक बचे हैं। इसमें से दो विधायक अघोषित रूप से भाजपाई हो चुके हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो उसके पास मात्र चार विधायक ही हैं। बसपा के जो साथी साथ छोड़ चुके हैं उनके स्थान पर नए चेहरों पर दांव लगाया जाएगा यह कहना गलत न होगा। इसलिए बसपा के लिए वर्ष 2022 का चुनाव काफी चुनौती भरा होगा। उसपर पिछले चुनाव से बड़ा लकीर खींचने की चुनौती होगी।
बसपा को कहा अलविदा
असलम राइनी, हाकिम लाल बिंद, हाजी मोहम्मद मुजतबा सिद्दीकी, हरगोविंद भार्गव, सुषमा पटेल, असलम चौधरी, बंदना सिंह, शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली, लालजी वर्मा व राज अचल राजभर सभी विधायक हैं। वर्ष 2017 में इन्होंने पार्टी छोड़ी थी। बृजेश पाठक, स्वामी प्रसाद मौर्या, रोमी साहनी और राजेश त्रिपाठी प्रमुख रहे।