बटुक भैरव बाबा मन्दिर में भैरव अष्ठमी का आयोजन

ललितपुर— जनपद का इकलौता प्राचीन बटुक भैरव बाबा मन्दिर में भैरव अष्ठमी का आयोजन विधिवत पूजन कर किया गया । इसी अवसर पर विधिक सेवा प्राधिकरण ने वैधिक साक्षारता शिविर का आयोजन किया । दैनिक सत्ता सरकार परिवार द्वारा सिविल लाइन स्थित बटुक भैरव बाबा मन्दिर पर धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ, तदोपरांत विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा वैधिक साक्षारता शिविर भी आयोजित किया गया जिसकी अध्यक्षता सींनियर डिवीजन सिविल जज
डॉ सुनील कुमार सिंह ने कहा कि
वैवाहिक विवादों से न हो परेशान ,जिला वैधिक सेवा प्राधिकरण से कराए सरल समाधान ,उन्होंने बताया कि महिलाओं बच्चों, गरीबों व कमजोर वर्ग के व्यक्तिओ को निशुल्क विधिक सहायता व सलाह का अधिकार विधिक सेवा प्राधिकरण वैधिक साक्षारता शिविर में बोलने का अधिकार दिया है।

डॉ सुनील कुमार सिंह सींनियर डिवीजन सिविल जज ने बटुक भैरव बाबा जी के मंदिर में मथ्था टेककर पूजा अर्चना की

डॉक्टर सुनील कुमार सिंह सिविल जज सीनियर डिवीज़न ललितपुर द्वारा अवगत कराया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ललितपुर द्वारा घरेलु हिंसा से पीड़ित महिलाओं को उनके वादों की पैरवी के लिए नि शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जाता है। महिलाओं का यह अधिकार है कि घरेलू हिंसा की धारा पाँच के अधीन उन अधिकारों को प्राप्त कर सकती हैं।संरक्षण अधिकारी एवं सेवा प्रदाता या निकटतम पुलिस थाने के भार साधक अधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह पीड़ित महिलाओं को शिकायत दर्ज करने में सहायता करे और धारा नौ एवं दस के अधीन अनुतोष के लिए आवेदन करने में सहायता करें।महिलाओं का यह अधिकार है कि वे घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा बारह,अठारह, उन्नीस, बीस, इक्कीस, बाईस और तेईस के अधीन शिकायत करने या किसी न्यायालय को सीधे ही अनुतोष के लिए आवेदन कर सकती है। पैम्फलेट जो बाँटे गए हैं उसमें दर्शित हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करके विस्तृत जानकारी ले सकती है या सचिव हरीश भास्कर से सम्पर्क कर सकती है।
ज़मानत पुलिस थाना या न्यायालय से कराई जा सकती है। बिना जमानतीय अपराध में मैजिस्ट्रेट न्यायालय को यह अधिकार होता है की ज़मानत स्वीकार करें अथवा अस्वीकार करे। जो अपराध मृत्युदंड या आजीवन कारावास द्वारा दंडनीय होता है उसमें मैजिस्ट्रेट द्वारा तब ही ज़मानत दिया जा सकता है जबकि यह सिद्ध होने के कारण हों कि व्यक्ति दोषी नहीं है।
काल भैरव : जो माने जाते हैं भगवान शिव के ही स्वरूप
कालभैरव को भगवान शिव का रौद्र रूप माना जाता है। मान्यता के अनुसार काल भैरव की पूजा से रोगों और दुखों से निजात मिल जाता है। इसके अलावा काल भैरव की पूजा करने से मृत्यु का भय दूर होता है और कष्टों से मुक्ति मिलती है यह बात वरिष्ठ अधिवक्ता के के बंशल ने कही

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निशाकांत शर्मा (सहसंपादक)

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