
उप मुख्यमंत्री को भी एटा के फरियादियों पर नहीं आई दया
एटा। सितम्बर माह के अंतिम सप्ताह में एटा में चुनावी बिगुल फूंकने आए उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी को ग्रीन गार्डन में सभा के समापन के बाद लगभग चार पांच सौ लोगों ने अपनी समस्याओं के निराकरण हेतु प्रार्थना पत्र सौंपे थे। तब ऐसा लग रहा था कि पूरे का पूरा जनपद समस्या ग्रस्त है और जिला स्तर पर जनता की समस्या का कोई निराकरण नहीं होता। हर कोई अपना प्रार्थना पत्र उप मुख्यमंत्री के हाथ में ही पकड़ाना चाह रहा था, वह भी इस आशा के साथ कि उप मुख्यमंत्री उन पर जरूर कोई ऐसी कार्रवाई करेंगे जिससे उन्हें न्याय मिलेगा। लेकिन आशान्वित जनता के दिल पर वैसा ही कुठाराघात हुआ जैसा जिला स्तर पर जिलाधिकारी, मंत्री, सांसद, विधायक को प्रार्थना पत्र देने पर हुआ था। आज 19 अक्टूबर को 21 दिन बीतने के बाद भी एटा की जनता के प्रार्थना पत्रों पर कोई कार्रवाई होने की क्रिया प्रतिक्रिया मालूम नहीं पड़ रही है।
उप मुख्यमंत्री जी! जब आप मंच पर थे तब शायद आपने सुना हो, मंच से यह उद्घोष बार बार किया जा रहा था कि प्रार्थना पत्र देने वाले लोग प्रार्थना पत्र अपने-अपने विधायकों को दे दें वे उप मुख्यमंत्री जी तक पहुंच जायेंगे। उप मुख्यमंत्री जी आपने देखा होगा कि जनता फिर भी अपने प्रार्थना पत्र आपके ही हाथों में सौंपने को टूट पड़ी थी। बहुत से लोग फिर भी आप तक नहीं पहुंच सके। उप-मुख्यमंत्री जी जान सको तो जान लो कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जिला स्तर पर की गई व्यवस्था सुचारू रूप से काम नहीं कर रही, इसीलिए विधायकों के हाथों में प्रार्थना पत्र सौंपने की बजाय आपको दिये गये थे। लेकिन भोली भाली जनता को क्या मालूम था कि आप तो लेने (वोट)की बात पक्की करने आए थे, पीड़ित जनता को कुछ देने के लिए नहीं आए थे। हो सकता है कि एटा की जनता के प्रार्थना पत्र भी कार्रवाई करने के लिए आप अपने साथ न ले गए हों अथवा किसी विधायक ने निकाल लिए हों और वह जनता की होशियारी की हवा निकाल कर मन ही मन खुश हो रहा हो। जो भी हुआ हो लेकिन जनता की आशाओं पर कुठाराघात जरूर हुआ है। जनता न्यायिक प्रक्रिया महंगी होने के कारण मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, मंत्री, सांसद, विधायक और जिलाधिकारी प्रार्थना पर देती है ताकि उसे जल्दी और सस्ता न्याय मिल सके।