मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर गोष्ठी का आयोजन –
एटा,

मेंटल हेल्थ एक ऐसा विषय है जो हमारे जीवन में बेहद अहमियत रखता है, फिर भी ज्यादातर लोग इसकी अनदेखी ही करते हैं. मेंटल स्ट्रेस, डिप्रेशन, इंजायटी से लेकर हिस्टिरिया, डिमेंशिया, फोबिया जैसी कई मानसिक बीमारियां है जो पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है. कोरोना के इस दौर में तो सोशल डिस्टेंसिंग, आइसोलेशन के कारण ये समस्याएं और भी बढ़ गई हैं. ऐसे में ‘मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता’ ये विषय और भी ज्यादा प्रासंगिक हो गया है. पूरी दुनिया में 10 अक्टूबर को वर्ल्ड मेंटल हेल्थ डे के रूप में मनाया जाता है।
लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से ही हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। इस उपलक्ष्य में रविवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश कुमार त्रिपाठी की अध्यक्षता में गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान डॉ त्रिपाठी ने कहा कि भागदौड़ भरी जिंदगी व अनियमित जीवनशैली के कारण थकान होना आम बात है। शरीर की थकान जब शारीरिक बीमारी का कारण बनती है तो हम इलाज या अन्य उपायों के जरिए ठीक हो जाते हैं। परंतु मानसिक थकान से हम मानसिक तौर पर अस्वस्थ होते हैं जिसकी ओर हमारा ध्यान नहीं जाता। कई बार पढ़ाई, काम का बोझ या करियर को लेकर हमारी चिंता हमें तनाव देती है। यह लंबे समय तक रहा तो डिप्रेशन यानी अवसाद में तब्दील हो सकता है। कोरोना में मानसिक तनाव का बढ़ना ,अनावश्यक नकारात्मक सोच उत्पन्न होना मेंटल हेल्थ पर बुरा प्रभाव डाल सकता है। अतः मेंटल हेल्थ अर्थात मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होना बेहद जरूरी है।
मानसिक स्वास्थ्य के नोडल अधिकारी डॉ अभिनव दुबे ने बताया कि इस बार की थीम है ‘एक असमान दुनिया में मानसिक स्वास्थ्य ‘ है। उन्होंने बताया कि आमतौर पर ज्यादातर लोग मानसिक स्वास्थ्य की ओर ध्यान नहीं देते। वर्तमान जीवन शैली में कई तरह के दबाव,चिंता, तनाव के कारण लोग डिप्रेशन और अन्य मानसिक बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। डिप्रेशन बहुत ज्यादा हो तो व्यक्ति के मन में आत्महत्या तक के ख्याल आने लगते हैं। मानसिक विकारों के प्रति लोगों के बीच जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। नोडल अधिकारी ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए मंडी समिति में शिविर लगाकर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के विषय में जानकारी दी गई। इस मौके पर लोगों को उचित चिकित्सीय परामर्श देने के साथ-साथ लोगों की जांच पड़ताल भी की गई।
गोष्ठी के दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ उमेश कुमार त्रिपाठी, नोडल अधिकारी डॉ अभिनव दुबे, एसीएमओ डॉ सतीश चंद्र नगर, डॉ ऋषभ, डीजीएम अभिषेक शुक्ला आदि मौजूद रहे।