कहते हैं कि मानवता की मिशाल सिर्फ़ भारत मे देखने को मिलती है या फ़िर इतिहास के पन्नों मे दर्ज भी है लेकिन

*कहते हैं कि मानवता की मिशाल सिर्फ़ भारत मे देखने को मिलती है या फ़िर इतिहास के पन्नों मे दर्ज भी है लेकिन….*

एटा, दिल्ली…

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दुनिया के हर कोने मे जिस वायरस ने अपने पैर पसारे है ओर भारत ने अपने पैरो से सोचा था कि हम यह जंग जीत जायेगे परंतु एसा सम्भव नही लगता है क्युकि के इस वीडियो ने मानवता की सारी हदो को तोड़ दिया है क्युकि जिन स्वस्थ्य कर्मियो के लिये हमने चोपर जहाज से फ़ूलो की बर्षा की थी वही स्वास्थ्यकर्मी अपनी जिम्मेदारीयो से भाग भी रहे,हम आपको याद दिला है भारत के यही वो निक्कमे भगवान है जो सरकार की भी खाते है ओर प्राइबेट क्लिनिक खोल कर मरीजो से अनाप सनाप पैसो की माग करके उनकी जिन्दगियो से दिन रात खेलते है,

भारत एक एसा देश है कि कब कौन कब भगवान बना दिया जाये सुबह होते-होते पता ही नहीं चलता है क्युकि भारत को उपाधी भी यही मिली है कि सारे भगवान भारत यही पैदा होते हैं खैर जो भी हो लेकिन धरती है यह कथित भगवान जो की जिन्दगियो से खेल भी रहे है ओर व्यवस्थाये भी कुड़ा किये हुये है,दिल्ली के इस होस्पिटल मे आप देख सकते हैं कि लाशो के उपर लाशे रखी है ओर सरकारे AC मे बैठक करे जा रही हैं, *दुर्भाग्य है हम मे है,*

एसा ही एक मामला हमे एक सुत्र से प्राप्त हुआ है कि जनपद एटा के JLN collge मे श्रमिको को रखा गया है जहा की व्यवस्थाये ठीक नर्क से कम नही है, यहा ना खाने के लिये सही भोजन है ओर ना ही पिने के लिये पानी, परंतु मानुष तो बंधुआ है तो सिस्टम से बधा हुआ है,मगर ध्यान देने की बात है एक कोरोना से ग्रसित व्यक्ति इसी कोरोन्टैन सेन्टर से पोजिटिव निकला है,अगर जिला प्रशासन अभी भी इस पुरे मामले को लूडो का खेल समझ रहा है तो फ़िर जिला प्रशासन दिमाग से कमजोर है क्युकि इस सेन्टर की कइ तस्वीर साफ़ साफ़ यह वया करती है कि जिला प्रशासन के अक्ल के घोडे हाथ से छुट चुके है ओर बेलगाम क्या होता है सभी भलिभाति जानते है,

सेन्टर की साफ़ सफ़ाइ व्यवस्था पर एक बार जिलाधिकारी सुखलाल भारती जी अपने मुखारबिन्दु से क्या- क्या बोल चुके हैं सभी ने सुना है….

*मरने को छोड़ दिये है क्या…*
जिले के जितने भी कर्मी हो किसी के पास मास्क के साथ साथ PPE किट भी नहीं है,बस कर्मी भी क्या करे,शिकायत भी करे तो ना सीधा लिया जाता है ओर ना उल्टा…. इस लिये जिन्दगियो को जी रहे हैं ओर अपने कर्म कर रहे हैं, जब की जिले के स्वास्थ विभाग के पास कइ मदो मे आज भी पैसा भरा हुआ है, लेकिन हिस्सेदारी ने जिन्दगियो को खतरे मे डाल् दिया है,कुछ कर्मी तो मेडिकल से खुद के लिये मास्क खरीद कर पहन रहे हैं,अब एसे मे कैसे कह सकते हैं कि हम सुरक्षित हाथो मे है,

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